नागपुर पुलिस ने बनाया ग्रीन कॉरिडोर (सौजन्य-नवभारत)
Nagpur Police VIP Security Protocol: नागपुर में दोपहर की चिलचिलाती धूप, मानो सूर्य देवता आग बरपा रहे हों। ऐसे में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू एक कार्यक्रम से सिटी में लौट रही थीं। महामहिम की सुरक्षा पुलिस के लिए सर्वोपरि होती है और प्रोटोकॉल के अनुसार यातायात व्यवस्था बनाई जाती है। ऐसे में सुरक्षा के लिए आमजनों को बैरिकेड लगाकर रोका गया जिससे काफिले के बीच कोई खलल न आ जाए।
एक तरफ राष्ट्रपति थीं और दूसरी तरफ गर्भवती थी। प्रसूती के लिए उसे अस्पताल जाना था और बीच रास्ते में ही लेबर पेन होने लगा। बड़ी आपाधापी में पुलिस ने मानवता का धर्म निभाया और पूरी सुरक्षा का ध्यान रखते हुए महिला को सुरक्षित अस्पताल पहुंचाया। पुलिस के इस कार्य की सड़क पर रोड खुलने का इंतजार कर रहे नागरिकों ने भी सराहना की।
एम्स अस्पताल में आयोजित दीक्षांत समारोह में हिस्सा लेने के लिए राष्ट्रपति नागपुर आईं थीं। कार्यक्रम निपटते ही पुलिस (Nagpur Police) ने उनके लौटने की तैयारी शुरू कर दी। चिचभवन चौक पर यातायात व्यस्त होता है। ऐसे में बेलतरोड़ी पुलिस ने यहां विशेष इंतजाम किया था। सभी दिशा से आने वाले वाहनों को बैरिकेड लगाकर रोक दिया। लगभग 12.10 बजे का समय था।
ऐसे में 9 माह की गर्भवती महिला टैक्सी में एम्स अस्पताल ही जा रही थी। डॉक्टर ने उसे भर्ती होने की सलाह दी थी। अन्य वाहनों के साथ उसकी टैक्सी भी रुकी हुई थी। अचानक उसके पेट में दर्द होने लगा। वाहन में रिश्तेदार महिला भी सवार थी। वह भागती हुई एपीआई काकड़े, हेड कांस्टेबल प्रशांत ठवकर और अजय नेवारे के पास पहुंची। रास्ता रोकने के लिए पुलिस पर बिफरी और गर्भवती की अवस्था की जानकारी दी।
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एक तरफ महिला की हालत और दूसरी तरफ राष्ट्रपति का काफिला निकलने में महज कुछ मिनट ही बाकी थे। ऐसे में कोई भी जोखिम उठाना मतलब नौकरी पर बात आने जैसा था। काकड़े, ठवकर और नेवारे ने सबसे पहले सामने लगी अन्य वाहनों की कतार को एक तरफ किया।
थानेदार मुकुंद कवाड़े ने बीट मार्शल धनराज गजभिए को जिम्मेदारी सौंपी। इसके साथ ही पेट्रोलिंग व्हीकल को वायरलैस पर जानकारी दी गई। धनराज ने महिला की गाड़ी को एस्कॉर्ट किया। सामान्य वाहन आते देख कुछ पुलिसकर्मी (Nagpur Police) अचानक सकते में आ गए लेकिन उन्हें जब महिला की अवस्था बताई गई तो वह सुरक्षित एम्स अस्पताल पहुंच गई।
वैसे तो सभी तपती धूप में परेशान थे। हर किसी के मन में बस यही बात थी कि कब काफिला निकले और कब वो अपने रास्ते जाएं लेकिन समय रहते महिला के वाहन को रास्ता मिलने से उन्होंने संतोष कर लिया।