चूल्हा जलाने पर मजबूर हुए होटल व्यापारी, धुले में गैस की आपूर्ति बाधित होने पर बढ़ी समस्या
Hotel Industry Gas Crisis Dhule: धुले में एलपीजी गैस की आपूर्ति बाधित होने से होटल व्यापारियों को चूल्हा जलाने पर मजबूर होना पड़ रहा है। गैस की भारी किल्लत से व्यवसाय प्रभावित है।
- Written By: अनिल सिंह
Hotel Industry Gas Crisis Dhule (फोटो क्रेडिट-X)
Dhule LPG Gas Shortage: महाराष्ट्र के धुले जिले में एलपीजी (LPG) गैस की भारी किल्लत ने होटल व्यवसायियों और छोटे भोजनालय संचालकों के सामने बड़ा संकट खड़ा कर दिया है। पिछले कुछ दिनों से कमर्शियल गैस सिलेंडरों की आपूर्ति बाधित होने के कारण अब व्यापारियों को मजबूरन पुराने ‘मिट्टी के चूल्हों’ और लकड़ी का सहारा लेना पड़ रहा है। धुले शहर और आसपास के इलाकों में गैस वितरण प्रणाली पूरी तरह चरमरा गई है, जिससे न केवल होटल मालिकों का मुनाफा प्रभावित हो रहा है, बल्कि ग्राहकों को भी समय पर भोजन मिलने में कठिनाई हो रही है।
NDTV की रिपोर्ट के मुताबिक स्थानीय होटल एसोसिएशन के अनुसार, गैस की आपूर्ति में अचानक आई कमी मिडल ईस्ट में चल रहे संघर्ष की वजह से है। आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) में तकनीकी खराबी और मांग के मुकाबले कम आवंटन के कारण होटल व्यापारी परेशान हो रहे हैं। कमर्शियल गैस की आपूर्ति ठप हो गई है। इसलिए धुले के कई प्रसिद्ध ढाबों और नाश्ते के केंद्रों पर अब सुबह से ही लकड़ियाँ सुलगाई जा रही हैं। व्यापारियों का कहना है कि चूल्हे पर खाना बनाना न केवल समय लेने वाला है, बल्कि इससे निकलने वाला धुआं कर्मचारियों के स्वास्थ्य और होटल की स्वच्छता के लिए भी चुनौती बना हुआ है।
चूल्हे के धुएं में बीत रहा व्यापारियों का दिन
धुले के आगरा रोड और चालीसगांव रोड स्थित कई होटलों में अब सिलेंडर की जगह लकड़ियों के ढेर नजर आ रहे हैं। होटल मालिकों का कहना है कि वे ग्राहकों को वापस नहीं भेज सकते, इसलिए मजबूरी में चूल्हा जलाना पड़ रहा है। लकड़ी के बढ़ते दामों और चूल्हा सुलझाने में लगने वाली अतिरिक्त मेहनत ने लागत को दोगुना कर दिया है। इसके बावजूद, गैस की अनिश्चितता के चलते उनके पास कोई दूसरा विकल्प नहीं बचा है। कई छोटे दुकानदार तो ऐसे हैं जिन्होंने गैस न मिलने के कारण अपनी दुकानें अस्थायी रूप से बंद कर दी हैं।
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प्रशासन और गैस एजेंसियों की चुप्पी
गैस की इस किल्लत को लेकर स्थानीय प्रशासन और गैस वितरण एजेंसियों की ओर से अब तक कोई ठोस स्पष्टीकरण नहीं आया है। डीलरों का दावा है कि पीछे से ही आपूर्ति कम आ रही है, जबकि व्यापारियों का आरोप है कि कुछ जगहों पर सिलेंडरों की कालाबाजारी भी शुरू हो गई है। होटल व्यवसायियों ने चेतावनी दी है कि यदि अगले 48 घंटों में गैस की आपूर्ति बहाल नहीं की गई, तो वे जिला कलेक्ट्रेट के सामने प्रदर्शन करेंगे। धुले के औद्योगिक क्षेत्रों में भी इस कमी का असर दिखने लगा है।
ग्राहकों की जेब और स्वाद पर भी असर
गैस संकट का सीधा असर आम जनता की जेब पर भी पड़ रहा है। ईंधन की लागत बढ़ने के कारण कई होटलों ने खाने की थाली और नाश्ते की कीमतों में 10 से 20 प्रतिशत तक की वृद्धि कर दी है। इसके अलावा, चूल्हे पर बने खाने का स्वाद गैस से अलग होने के कारण नियमित ग्राहक भी शिकायत कर रहे हैं। धुले के निवासियों का कहना है कि एक तरफ महंगाई बढ़ रही है और दूसरी तरफ बुनियादी सुविधाओं जैसे गैस की कमी ने आम जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है।
