नागपुर: बाघों पर AI की नजर, गांव के पास पहुंचते ही ग्रामीणों को मिलेगी सूचना, नई तकनीक हुई शुरू
Nagpur Tiger Alert System: पेंच टाइगर रिजर्व व नागपुर वन क्षेत्र में AI आधारित टाइगर अलर्ट सिस्टम शुरू किया गया। बाघ के गांव के करीब पहुंचते ही सायरन से ग्रामीणों व वन अधिकारियों को सतर्क किया जाएगा।
- Written By: अंकिता पटेल
टाइगर अलर्ट सिस्टम, पेंच टाइगर रिजर्व, एआई तकनीक, (सोर्स: सौजन्य AI)
Nagpur Pench Tiger Reserve: वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में एक बड़ी तकनीकी उपलब्धि के तहत पेंच टाइगर रिजर्व के बफर क्षेत्र और नागपुर प्रादेशिक वन विभाग में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित टाइगर अलर्ट सिस्टम शुरू किया गया है। इस प्रणाली का उद्देश्य गांवों के आसपास बाघ की मौजूदगी का समय रहते पता लगाकर मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करना है।
बाघ के गांव के नजदीक पहुंचते ही सायरन बजेगा। राज्य सरकार से संबद्ध विशेष तकनीकी इकाई ‘मार्वल’ द्वारा विकसित यह सिस्टम बाघ की गतिविधियों पर नजर रखता है और उसके गांवों के नजदीक पहुंचने से पहले ही ग्रामीणों तथा वन अधिकारियों को सतर्क कर देता है।
अलार्म कॉल से बाघ की पहचान करेगी एआई तकनीक
विशेषज्ञों के अनुसार बाघ बेहद चुपचाप विचरण करते हैं और सुबह-शाम के समय अधिक सक्रिय रहते हैं। ऐसे में केवल दृश्य निगरानी पर्याप्त नहीं होती। शाकाहारी वन्यजीवों द्वारा दिया गया अलार्म कॉल शुरुआती चेतावनी का अधिक भरोसेमंद माध्यम साबित हो सकता है। यह प्रणाली इसी के मद्देनजर बनाई गई है।
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शाकाहारी जीवों के आवाज में चेतावनी ट्रैप कैमरा निगरानी व्यवस्था के विपरीत यह तकनीक मुख्य रूप से बायो-अकॉस्टिक्स यानी प्राकृतिक ध्वनियों के विश्लेषण पर आधारित है। एआई आधारित यह प्रणाली सांभर, हिरण, बंदर सहित अन्य शाकाहारी प्रजातियों की चेतावनी भरी आवाज (अलार्म कॉल) निकालेगी। ये आवाजें आमतौर पर आसपास किसी शिकारी, विशेषकर बाघ की मौजूदगी का संकेत देती हैं।
संरक्षण की दिशा में नया कदम
बढ़ती बाध आबादी और जंगलों की सीमाओं के आसपास मानव गतिविधियों में वृद्धि के बीच विशेषज्ञों का मानना है कि एआई आधारित निगरानी प्रणाली भविष्य में मानव-वन्यजीव संघर्ष रोकने का प्रभावी माध्यम बन सकती है। इससे न केवल लोगों की जान और पशुधन की सुरक्षा होगी, बल्कि वन्यजीवों के संरक्षण को भी मजबूती मिलेगी और मानव तथा वन्यजीवों के बीच सह-अस्तित्व को बढ़ावा मिलेगा।
मोबाइल पर मिलेगा अलर्ट
जैसे ही सिस्टम ऐसी ध्वनियों का पता लगाता है, वह तुरंत गांव में लगा सायरन बजाता है, मोबाइल फोन पर अलर्ट भेजता है और वन विभाग के केंद्रीय कंट्रोल रूम के डैशबोर्ड पर रियल टाइम जानकारी अपडेट कर देता है। इससे ग्रामीणों और वन कर्मियों को समय रहते एहतियाती कदम उठाने में सहायता मिल जाती है।
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SP पोद्दार की मौजूदगी में परीक्षण
हाल ही में पेच टाइगर रिजर्व के बफर क्षेत्र स्थित चारगांव में नागपुर ग्रामीण पुलिस अधीक्षक हर्ष पोद्दार की मौजूदगी में इस तकनीक का प्रदर्शन किया गया। परीक्षण के दौरान इसके परिणाम उत्साहजनक रहे। अधिकारियो का मानना है कि यह प्रणाली मानव और मवेशियों पर होने वाले बाधों के हमलों को काफी हद तक कम कर सकती है।
