रेलमार्ग भूमि अधिग्रहण पर टकराव तेज, मनमाड-इंदौर रेल परियोजना पर किसानों का आक्रोश

Maharashtra Farmers Protest: धुले में मनमाड-इंदौर रेल परियोजना भूमि अधिग्रहण विवादों में फंसी है। कम मुआवजे के खिलाफ किसानों ने आंदोलन की चेतावनी दी है।
Conflict intensifies over railway land acquisition; farmers express anger over Manmad-Indore rail project.
प्रतीकात्मक तस्वीर ( सोर्स: सोशल मीडिया )
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Manmad Indore Rail Project: धुले बहुप्रतीक्षित मनमाड-इंदौर रेलवे परियोजना अब भूमि अधिग्रहण के मोर्चे पर विवादों में घिरती नजर आ रही है। धुले तालुका के प्रभावित किसानों ने प्रशासन द्वारा दिए जा रहे कम मुआवजे के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। मनमाड-इंदौर रेलमार्ग बाधित किसान संघर्ष समिति' के नेतृत्व में किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं, तो वे भूसंपादन की प्रक्रिया को पूरी तरह ठप कर देंगे।

किसानों के गुस्से से प्रोजेक्ट की रफ्तार हुई सुस्त

बालापूर से पुरमेपाड़ा के बीच प्रस्तावित इस रेलवे लाइन से बालापूर, वडजाई, पिपरी, सावलदे, अवधान, ललिंग, रानमला, आर्वी और पुरमेपाड़ा जैसे कई गांवों की हजारों एकड़ बागायती जमीन प्रभावित हो रही है। किसानों का पक्ष है। खेती ही आय का एकमात्र स्रोत है। जमीन जाने से सैकड़ों परिवार भूमिहीन हो जाएंगे, किसानों ने नरडाणा-बोरविहीर परियोजना का उदाहरण देते हुए कहा कि उस समय कम मुआवजे और गलत प्लानिंग की वजह से कई खेत कंजर हो गए और जलभराव की समस्या पैदा हुई।

शहरी दर पर मुआवजे की मांग

किसान संघर्ष समिति ने स्पष्ट किया है कि बालापूर, पिंपरी और अवधान जैसे गांव अब नगर निगम (महानगरपालिका) क्षेत्र के दायरे में आते हैं। इसलिए यहां की जमीन का मूल्यांकन शहरी बाजार दर के अनुसार किया जाना चाहिए किसानों ने प्रति वर्गमीटर 8 हजार रुपये मुआवजे के साथ-साथ परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी और 'परियोजना प्रभावित प्रमाणपत्र देने की पुरजोर मांग की है।

समृद्धि महामार्ग जैसा 'पैटर्न' अपनाने पर जोर

  • एसडीएम रोहन कुंवर को सौंपे गए ज्ञाधन में किसानों ने मांग की है कि उन्हें समृद्धि महामार्ग की तर्ज पर 'तन टाइम सेटलमेंट' के तहत न्यायसंगत मुआवजा दिया जाए।
  • साथ ही 2013 के भूमि अधिग्रहण कानून का अक्षरशः पालन हो।
  • किसानों का कहना है कि जब तक मुआवजे पर लिखित आदेश जारी नहीं होता, ये सर्वेक्षण या अधिग्रहण की किसी भी कार्रवाई में प्रशासन को सहयोग नहीं करेंगे।
  • इस आंदोलन और ज्ञापन सौंपने के दौरान जवैश चौधरी, डॉ. प्रशांत सालुंखे, डॉ. योगेश गवली, सुधाकर पाटिल सहित बड़ी संख्या में प्रभावित किसान मौजूद रहे।
  • किसानों के इस सख्त रुख ने अब प्रशासन और रेलवे विभाग की चिंता बढ़ा दी है।