चंद्रपुर में बाघ के हमले से एक और महिला की मौत, जिले में इस साल 45 लोगों ने गंवाई जान

Chandrapur News: चंद्रपुर के गुंजेवाही में बाघ ने महिला पर हमला कर मौत का कारण बना। वनविभाग ने गश्त बढ़ाई, परिवार को राहत दी। बाघ पर निगरानी बढ़ाई गई।
Chandrapur Tiger Attack
बाघ के हमले से महिला की मौत (सोर्स: सोशल मीडिया)
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Chandrapur Tiger Attack News: चंद्रपुर जिले में मानव वन्यजीव संघर्ष खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। रविवार को जिले की सिंदेवाही तहसील के गुंजेवाही गांव में बाघ के हमले का एक ताजा मामला सामने आया। जिसमें एक महिला की मौत हो गयी है। छाया अरुण राउत (47) नामक यह महिला खेत में कपास और तुअर चुनने गयी थी।

पिछले कुछ सालों में चंद्रपुर जिले में मानव-वन्यजीव संघर्ष अपने चरम पर पहुंच गया है। ग्रामीण इलाकों में लोग, खासकर खेतों में काम करने वाले और चरवाहे, वन्यजीवों के हमलों का शिकार हो रहे हैं। मानव-वन्यजीवों का संघर्ष अब हिंसक रूप ले चुका है, जिसकी कई घटनाएं आए दिन सामने आ रही है। ताजा मामले में शनिवार को सिंदेवाही तालुका के गुंजेवाही में कपास और तूअर चुनने अपने खेत में गई छाया राउत की मौत हो गयी।

कपास बिनने खेत गई थी महिला

मिली जानकारी के मुताबिक, छाया उर्फ ​​अरुणा राउत हमेशा की तरह शनिवार सुबह अपने खेत में कपास और तुअर तोड़ने गई थी। शाम करीब 4 बजे घात लगाए बैठे बाघ ने अचानक उस पर हमला कर दिया। जब वह शाम 6 बजे के बाद भी घर नहीं लौटी, तो उसके परिवार ने उसे ढूंढना शुरू किया। जब उस इलाके के कुछ लोगों को खेत पर ले गए, तो उन्हें खेत के पास खून से लथपथ छाया उर्फ अरुणा की लाश मिली।

घटना की सूचना सिंदेवाही वनविभाग और पुलिस को दी गई। वनविभाग के अधिकारी और कर्मचारी मौके पर पहुंचे। जांच के बाद लाश को कब्जे में ले लिया गया। इस घटना से गांव में दहशत का माहौल बन गया है। वन विभाग ने मृतक के परिवार को तुरंत 25,000 रुपये नकद सहायता दी। वनविभाग ने हमला करने वाले बाघ की तस्वीर कैद करने के लिए इलाके में कैमरे लगाए हैं और सतर्क रहने की चेतावनी दी है। वन विभाग ने गश्त बढ़ा दी गई है। इस बाघ को पकड़ने की मांग आज संतप्त नागरिकों ने की है।

हमलों को रोकने में वन विभाग नाकाम

  • चंद्रपुर जिले को राज्य में सबसे ज़्यादा बाघों की आबादी वाले जिले के तौर पर जाना जाता है। पिछले कुछ महीनों में मानव-वन्यजीव संघर्ष के मामले बड़े पैमाने पर बढ़े हैं और ग्रामीण इलाकों में डर का माहौल बन गया है।
  • किसानों की वन्यजीवों की बढ़ती आवाजाही पर नियंत्रण, सही मुआवज़ा और बचाव के उपायों की लगातार मांगों के बावजूद हमलों का सिलसिला थम नहीं रहा है। पिछले पांच सालों में मानव-वन्यजीव संघर्ष में 200 से ज़्यादा लोगों की मौत हो चुकी है।
  • हालांकि, वन विभाग इस संघर्ष को रोकने में नाकाम रहा है और अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाए जाने का लोगों का कहना है। साल का 45वां शिकार
  • चंद्रपुर जिले में चल रहे मानव-वन्यजीव संघर्ष में यह 45वां शिकार है।
  • अब तक कुल 45 लोगों की मौत हो चुकी है, जिसमें बाघ के हमले में 41, तेंदुए के हमले में 2 और भालू और हाथी के हमले में एक-एक की मौत हुई है।
  • इससे जिले में खेती और पशुपालन समेत कई कारोबार मुश्किल में पड़ गए हैं।
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