
फाइल फोटो (सोर्स: सोशल मीडिया)
चंद्रपुर: ताडोबा राष्ट्रीय उद्यान महाराष्ट्र का एक प्रमुख राष्ट्रीय उद्यान है जो चंद्रपुर जिले में स्थित है। इसकी स्थापना 1955 में हुई थी यह महाराष्ट्र का पहला राष्ट्रीय उद्यान है। ताडोबा-अंधारी टाइगर रिजर्व महाराष्ट्र में एक बाघ रिजर्व है। पार्क की मुख्य विशेषता पार्क में पाए जाने वाले मगरमच्छ और गावा हैं। यह परियोजना ताडोबा राष्ट्रीय उद्यान की 116.55 किमी क्षेत्र और अंधारी अभयारण्य का 508.85 किमी दो क्षेत्र संयुक्त रूप से गठित है। इसका कुल क्षेत्रफल लगभग 625 वर्ग किमी है। ताडोबा में जंगल सफारी करने वालों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
जिप्सी वेलफेयर एसोसिएशन ने ताडोबा के वन संरक्षक और क्षेत्र निदेशक के कार्यालय को एक बयान में 15 मांगें की हैं, जिसमें ताडोबा अंधारी टाइगर रिजर्व में लागू ‘एक परिवार-एक नौकरी’ योजना को तत्काल रद्द करना भी शामिल है। मांग पूरी न होने पर 1 अक्टूबर से जंगल सफारी बंद कराने की चेतावनी दी है। बाघों को देखने न केवल राष्ट्रीय बल्कि विदेशी पर्यटक भी ताडोबा आते हैं।
हालांकि, ताडोबा के वन संरक्षक और क्षेत्र निदेशक कार्यालय ने एक निर्णय लिया है। जिसमें ‘एक परिवार एक रोजगार’ की घोषणा की गई है। यह गाइड और जिप्सी एसोसिएशन के साथ अन्याय है। इसलिए ताडोबा के कोर एरिया में जिप्सी धारकों को 15 वर्ष का कार्यकाल बढ़ाने के प्रस्ताव को असोसिएशन का विरोध है।
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गाइड और जिप्सी एसोसिएशन ने अगले सत्र से जिप्सियों का नवीनीकरण करने, अनापत्ति प्रमाण पत्र संलग्न करने, बफर एवं कोर चालक जिप्सी चालक उनके बगल में बैठें, जिप्सी चालक पर्यटकों की शिकायतों पर गाइड का पक्ष जाने बिना एकपक्षीय कार्रवाई (निलंबन की) न करें, सफारी शुल्क में 3000 रुपए और कोर में 3500 रुपए की वृद्धि, कोर और बफर जोन में जिप्सी परिवारों को साल में एक बार मुफ्त जंगल सफारी की सुविधा देने की मांग की गई।
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एसोसिएशन ने मोबाइल का उपयोग करने की अनुमति, स्थानीय सलाहकार समिति में जिप्सी कल्याण संघ के प्रतिनिधियों को शामिल करने, पर्यटन क्षेत्र में वाहनों के लिए गति सीमा 40 किमी रखने, 3 वाहनों को कम करके क्रूजर सफारी को बंद करें, जिप्सी कोटा और स्थानीय कोटा से 3 सफ़ारियां बढ़ाएं आदि मांगें की गईं। इन मांगों पर निर्णय न होने पर एक अक्टूबर से अनिश्चितकाल के लिए जंगल सफारी बंद करने की चेतावनी दी है।






