अतिक्रमण हटाने में हो नियमों का पालन (सौजन्यः सोशल मीडिया)
Nagbhid Encroachment Drive: चंद्रपुर नगर परिषद नागभीड़ क्षेत्र में अवैध और अनियमित अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया पिछले दो वर्षों से जारी है, लेकिन नोटिस जारी करने के अलावा कोई ठोस कानूनी कार्रवाई नहीं की गई है। नागरिकों का कहना है कि अतिक्रमण किसी ने भी किया हो, उसके विरुद्ध कार्रवाई अनिवार्य है। मगर जानबूझकर अनदेखी करना, संरक्षण देना या समर्थन करना कानून के विरुद्ध है।
हाल ही में अतिक्रमण हटाने का अभियान चलाया गया, पर लोगों का आरोप है कि कार्रवाई समान न्याय के आधार पर नहीं हुई। सार्वजनिक जमीन पर वर्षों पुराने अनधिकृत निर्माण भी मौजूद हैं, जिन पर बड़ी राशि खर्च होने के बावजूद उन्हें हटाने की दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं। नागरिकों ने मांग की कि स्थानीय स्वशासन निकाय तत्काल एक विशेष कार्ययोजना बनाकर ऐसे सभी अतिक्रमण हटाए, और तहसील कार्यालय, पीडब्ल्यूडी तथा पुलिस प्रशासन इसमें पूर्ण सहयोग दें। साथ ही भविष्य में सार्वजनिक भूमि पर नए अतिक्रमण न हों, यह सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी भी सभी विभागों को सामूहिक रूप से निभानी चाहिए।
नागभीड़ में पहली बार फुटपाथ पर दुकानों के माध्यम से किए गए अतिक्रमण पर कार्रवाई की गई, लेकिन इससे वहां दुकान लगाकर आजीविका चलाने वाले छोटे विक्रेताओं का रोजगार छिन गया। नागरिकों ने सवाल उठाया कि सीमांकन किस आधार पर किया गया और क्या सभी पर समान नियम लागू किए गए? संविधान के अनुच्छेद 21 में आजीविका के अधिकार की गारंटी है, जो फेरीवालों और सड़क विक्रेताओं पर भी लागू होती है।
दूसरे चरण की कार्रवाई में केवल आम नागरिकों के अतिक्रमण हटाए जाने की बात सामने आई है, जबकि बड़े व्यापारियों को कथित रूप से संरक्षण मिलने की चर्चा है। इससे आम नागरिकों में रोष है। लोगों का कहना है कि कार्रवाई में पक्षपात दिखाई दे रहा है, जिससे फुटपाथ पर दुकान लगाने वालों की आजीविका पर बड़ा संकट खड़ा हो गया है।
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नागभीड़ समता कॉलोनी के सचिव सागर शंभरकर ने कहा कि फिलहाल अभियान शांत है, लेकिन भविष्य में पुनः कार्रवाई होगी या नहीं, इस पर लोगों की नजरें टिकी हैं। नागरिकों ने मांग की कि नगर परिषद उन सभी लोगों पर तत्काल कार्रवाई करे जिन्हें पहले ही अतिक्रमण नोटिस जारी किए जा चुके हैं।