महाजेनको ट्रेनी मानदेय घोटाले पर हाईकोर्ट सख्त, नागपुर खंडपीठ ने शीर्ष अधिकारियों को दिया नोटिस
Chandrapur News: महाजेनको प्रशिक्षुओं के मानदेय में अनियमितता के आरोप पर हाईकोर्ट की नागपुर खंडपीठ ने वरिष्ठ अधिकारियों को नोटिस जारी किए और 24 दिसंबर तक जवाब मांगा।
- Written By: आकाश मसने
चंद्रपुर बिजली उत्पादन यूनिट (सोर्स: सोशल मीडिया)
MAHAGENCO Trainee Stipend Case: महाराष्ट्र बिजली उत्पादन कंपनी के तहत काम कर रहे प्रशिक्षुओं के मानदेय में अनियमितता के आरोप में उच्च न्यायालय की नागपुर खंडपीठ ने महाजेनको के वरिष्ठ अधिकारियों को नोटिस जारी किए हैं। न्यायालय ने इस मामले में जिन्हें नोटिस जारी किए है, उनमें महाजेनको के प्रबंध निदेशक, राज्य सूचना आयुक्त और राज्य के मुख्य सचिव का समावेश है।
इन अधिकारियों को प्रशिक्षुओं के मानदेय में कथित अनियमितता पर 24 दिसंबर तक अपना स्पष्टीकरण देने के निर्देश दिए है। कोर्ट ने यह निर्देश राष्ट्रीय मानवाधिकार संसाधन विकास संस्थान के ग्रामीण अध्यक्ष अधि। शेखर जनबंधु तथा अधि। अश्विन इंगोले द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई के दौरान दिए।
क्या है याचिकाकर्ता का आराेप?
याचिकाकर्ता ने दायर याचिका में यह आरोप लगाया है कि, चंद्रपुर ताप बिजलीघर में कार्यरत परियोजना पीड़ितों को पिछले कई वर्षों से अवैध रूप से उन्नत कुशल प्रशिक्षुओं की हैसियत से काम दिया जा रहा है।
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याचिकाकर्ता ने सूचना अधिकार कानून के तहत इस मामले की जानकारी महाजेनको से मांगी थी, उन्होंने जानकारी मांगी थी कि चंद्रपुर, कोराडी, खापरखेड़ा जैसे ताप बिजलीघरों में कार्यरत परियोजना पीड़ितों को दिए गए मानदेय की ऑडिट कॉपी दी जाए।
जानकारी देने से किया इनकार
याचिकाकर्ता का कहना है कि महाजेनको के प्रकाशगढ़ मुंबई स्थित मुख्यालय के जनसूचना अधिकारी और वरिष्ठ महाप्रबंधक (एचई) के साथ-साथ चंद्रपुर ताप विद्युत केंद्र के जनसूचना अधिकारी ने उन्हें यह जानकारी देने से इनकार कर दिया।
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इस संदर्भ में अपील किए जाने के बाद राज्य सूचना आयोग ने 4 अक्टूबर 2024 को एक आदेश जारी कर चंद्रपुर थर्मल पावर स्टेशन के लोक सूचना अधिकारी और प्रथम अपील अधिकारी को पहली सुनवाई में ही तुरंत जानकारी देने का आदेश दिया था।
याचिकाकर्ता का आरोप है कि ताप बिजलीघरों में स्किल्ड ट्रेनी के तौर पर कार्यरत प्रकल्प पीड़ितों को दिए जाने वाले मानदेय में बड़े पैमाने पर अनियमितता का संदेह है। उच्च न्यायालय नागपुर खंडपीठ के न्यायाधीश अनिल किल्लोर और न्यायाधीश रजनीश व्यास ने इस याचिका पर सुनवाई के दौरान मामले में महाजेनको के वरिष्ठ अधिकारियों से 24 दिसंबर तक जवाब मांगा है।
