Chandrapur News: इस्लाम का पवित्र रमजान माह शुरू, मस्जिदों में बढ़ी नमाजियों की तादाद, महीने भर होगी इबादत
Ramadan Begins Chandrapur: चंद्रपुर में पवित्र रमजान माह की शुरुआत के साथ मस्जिदों में नमाजियों की संख्या बढ़ी, वहीं छत्रपति महोत्सव 2026 की मैराथन में हजारों युवाओं ने उत्साह से भाग लिया।
- Written By: आंचल लोखंडे
iftar market rush (सोर्सः सोशल मीडिया)
Chandrapur Marathon 2026: गुरुवार, 19 फरवरी से पवित्र रमजान माह शुरू होने के साथ ही बाजारों में रौनक बढ़ गई है। सहरी से इफ्तार तक लगने वाली खाद्य सामग्री की बिक्री में तेजी आई है और बाजारों में उत्साह का माहौल देखा जा रहा है। गुरुवार को पवित्र रमजान का पहला रोजा रखा गया। इस्लाम धर्म में वर्ष में एक बार रमजान माह के दौरान मुस्लिम समुदाय एक महीने तक रोजा रखकर खुदा की इबादत करता है। दिनभर रोजा रखने के बाद इफ्तार के समय बाजारों की रौनक देखते ही बनती है।
रोजों के चलते मस्जिदों की विशेष रूप से साज-सज्जा कर उन्हें रोशनी से सजाया गया है। रोजेदार मस्जिदों में विशेष नमाज के साथ इबादत में जुटे हुए हैं। जिले की सभी मस्जिदों में नमाजियों की तादाद में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है। रमजान इस्लामी कैलेंडर का नौवां महीना होता है। कहा जाता है कि पूरी दुनिया की कहानी भूख, प्यास और इंसानी ख्वाहिशों के इर्द-गिर्द घूमती है, और रोजा इन तीनों पर नियंत्रण रखने की साधना है।
सहरी खाने से होती है दिन की शुरुआत
दिन की शुरुआत सुबह लगभग 4:30 से 5 बजे के बीच सहरी खाने से होती है। फज्र की नमाज से पहले सहरी खाई जाती है। इस नमाज के बाद रोजे की शुरुआत हो जाती है, जिसके बाद रोजेदार कुछ खा-पी नहीं सकते। दोपहर करीब 1 बजे जुहर की नमाज अदा की जाती है। इसके अलावा रोजेदार अपने दैनिक कार्यों के साथ कुरान पढ़ते हैं। शाम करीब 5 बजे असर की नमाज पढ़ी जाती है, जिसके बाद इफ्तारी की तैयारी शुरू हो जाती है। इफ्तारी में लोग फ्रूट चाट, खजूर, चने, शरबत, पकौड़ी और चटनी आदि बनाते हैं।
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खजूर खाकर खोलते हैं रोजा
शाम लगभग 6:30 से 7 बजे मगरिब की अजान होती है। अजान के कुछ मिनट बाद रोजेदार खजूर खाकर अपना रोजा खोलते हैं। रात करीब 9 बजे इशा की नमाज पढ़ी जाती है। मस्जिदों में इशा की नमाज के साथ तरावीह की नमाज भी अदा की जाती है, जिसके बाद लोग भोजन करते हैं। सुबह फिर सहरी के साथ अगले रोजे की शुरुआत होती है। यह सिलसिला पूरे महीने चलता है। रोजे के दौरान इंसान को अपनी सभी नफ्सी ख्वाहिशों पर अंकुश लगाना होता है। क्रोध, हिंसा, चुगली, झूठ, मोह, माया, लालच और द्वेष जैसी बुरी प्रवृत्तियों पर काबू पाने का अभ्यास ही रोजा कहलाता है।
