महाराष्ट्र सरकार की तिजोरी खाली! ठाणे-पालघर के ठेकेदारों का 2114 करोड़ बकाया; छोटे कॉन्ट्रैक्टरों की हालत खराब

Maharashtra News: महाराष्ट्र में ‘लाड़की बहिण’ जैसी योजनाओं से खजाने पर दबाव है। ठाणे-पालघर में PWD के 2,114 करोड़ के बिल 2022 से अटके हैं, 5,000 छोटे ठेकेदार परेशान, सिर्फ 434 करोड़ जारी।
Maharashtra's empty coffers stall 2114Cr in payments for Thane-Palghar contractors. Since 2022, 5000 small firms face ruin while preferential clearing of bills sparks corruption allegations.
सीएम देवेन्द्र फड़णवीस तस्वीर ( सोर्स: सोशल मीडिया )
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Maharashtra Government Budget Crisis News: ठाणे. 'लाड़की बहिण' एवं अन्य कल्याणकारी अनुदानित योजनाओं के चलते जहां एक तरफ राज्य सरकार की तिजोरी पर भार बढ़ता जा रहा है,वहीं ग्रामीण इलाकों में विभिन्न विकासकार्य के लिए सरकार के पास पैसे ही नहीं हैं। पूरे महाराष्ट्र की बात करें तो लगभग 89 हज़ार करोड़ रुपये के ठेकेदारों के पेमेंट दो साल से रुके हुए हैं। इनमें ठाणे,पालघर में कॉन्ट्रैक्टर का 2114 करोड़ का पेमेंट पेंडिंग है।

बताया गया कि पीडब्ल्यूडी के माध्यम से किए गए कई कार्यों का पैसा ठेकेदारों को वर्ष 2022 से ही नहीं मिल पाया है। एक तरफ जहां MMRDA, रोड डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन, CIDCO जैसी अथॉरिटी मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन में हजारों करोड़ रुपये के डेवलपमेंट प्रोजेक्ट्स की योजना बना रही हैं,वहीं पब्लिक वर्क्स डिपार्टमेंट के माध्यम से सरकार के प्रस्तावित इंफ्रा डेवलपमेंट करने वाले ठेकेदारों का 2114 करोड़ का बिल बकाया हो गया है।

छोटे ठेकेदारों की मुसीबत

ठाणे और पालघर जिलों के कॉन्ट्रैक्टर एसोसिएशन ने बुधवार को एक पत्रकार वार्ता कर अपनी आपबीती सुनाई। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार बड़ी कंस्ट्रक्शन कंपनियों के लिए रेड कार्पेट बिछा रही है,वहीं गांवों के सेमी-अर्बनाइज्ड इलाकों में इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट का काम करने वाले छोटे कॉन्ट्रैक्टर परेशान हैं। यह पढ़ें:- अमरावती का नया कीर्तिमान: 1,432 ग्राम पंचायतें बनीं ‘ओडीएफ प्लस’ मॉडल, स्वच्छता अभियान को मिली नई ऊंचाई

5 हजार से ज्यादा ठेकेदार

मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन के शहरों में कई प्रोजेक्ट चल रहे हैं। ट्रैफिक जाम कम करने के लिए नए रोड प्रोजेक्ट, मेट्रो प्रोजेक्ट और दूसरे इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट के काम हो रहे हैं। इसमें ठाणे और पालघर जिले भी शामिल हैं, ये दोनों ही मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन में ग्रामीण इलाके हैं। जो ठाणे और पालघर जिले के पब्लिक वर्क्स डिपार्टमेंट के तहत आते हैं और इसी डिपार्टमेंट के तहत रोड और ब्रिज जैसे प्रोजेक्ट चल रहे हैं।

इन दोनों जिलों में 5,000 से ज़्यादा छोटे कॉन्ट्रैक्टर हैं। ऑर्गनाइजेशन के मुंबई, ठाणे और पालघर डिविजनल प्रेसिडेंट मंगेश आवले ने बताया कि हमारे कॉन्ट्रैक्टरों को 2022 से काम का पेमेंट नहीं मिला है। वे पिछले कुछ महीनों से लगातार आंदोलन कर रहे हैं। इसमें रेजिडेंशियल बिल्डिंग्स, ऑफिस बिल्डिंग्स, स्टेट हाईवे, स्टेट हाईवे ब्रिज, डिस्ट्रिक्ट रोड, हाईवे रोड को जोड़ने वाले रोड और ब्रिज, रोड और ब्रिज (ट्राइबल), रोड और ब्रिज (नॉन-प्लान) के काम शामिल हैं। इन कामों का 2,114 करोड़ रुपये का बकाया है।

लेकिन सिर्फ 434 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं। सरकार से मिले फंड को एग्जीक्यूटिव इंजीनियर नियमों को ताक पर रखकर अपनी पसंद के कॉन्ट्रैक्टर्स को पेमेंट कर रहे हैं। लेकिन आम ठेकेदारों को फंड की कमी का कारण बता दिया जाता है। कॉन्ट्रैक्टर को यह भी नहीं बताया जा रहा है कि कितना फंड मिलेगा और क्या पेमेंट किया जाएगा।

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