सोयाबीन के खेत में छोड़ दी बकरियां, न पंचनामा न मदद...भारी बारिश से चंद्रपुर में फसलें बबार्द

Chandrapur News: चंद्रपुर जिले में भारी बारिश से किसानों की सोयाबीन और कपास की फसलें बर्बाद। वरोरा के किसानों ने नुकसान से निराश होकर खेतों में बकरियां छोड़ दीं।
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खेत में बकरियां (सोर्स: सोाशल मीडिया)
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Heavy Rains Destroy Crops In Chandrapur: भारी बारिश के कारण चंद्रपुर जिले के किसानों के सपने चकनाचूर हो गए हैं। कड़ी मेहनत से उगाई गई सोयाबीन और कपास की फसलें लगातार भारी बारिश के कारण बर्बाद हो गई है। वरोरा तहसील में बारिश से हुए नुकसान के बाद किसानों ने फसल काटने के बजाय खेत में बकरियां छोड़ दी है।

वरोरा तहसील के केम गांव के किसान अविनाश पावड़े ने बताया कि 12 एकड़ सोयाबीन की फसल बर्बाद होने के कारण उन्होंने खड़ी फसल काटने के बजाय उसे बकरियों को चरने के लिए छोड़ दिया। अभी तक पंचनामा के निर्देश नहीं हैं। अधिकारी कुछ भी कहने को तैयार नहीं हैं, इसलिए किसान आंसू बहाते हुए सरकार से मदद की उम्मीद लगाए बैठे हैं।

काट भी नहीं सकते फसल

पावड़े के पास 12 एकड़ ज़मीन है। उन्होंने सोयाबीन बोया था। जैसे ही फसलें अच्छी तरह फल देने लगीं, भारी और लगातार बारिश के कारण पूरी तरह से फसल नष्ट हो गई। फसल इतनी खराब हो गई कि उसे काटना असंभव हो गया और खर्चे भी पूरे नहीं हो पा रहे थे, तो उन्होंने खेत में लगी फसल को जानवरों के लिए चराने का फैसला किया। पावड़े ने अपनी बकरियों को सोयाबीन के खेत में छोड़ दिया। वे कहते हैं, अब यह फैसला इसलिए लेना पड़ा ताकि यह फसल मन को पीड़ा न दे, कम से कम जानवरों को तो इसका फायदा मिल सके। चंद्रपुर जिले में भारी नुकसान के बावजूद, शासन-प्रशासन अभी तक उनके खेतों तक नहीं पहुंचा है।

नुकसाना का पंचनामा भी नहीं हुआ

किसानों ने इस बात पर खेद व्यक्त किया कि प्रशासन ने अभी तक पंचनामा नहीं किया है। किसान आशंका व्यक्त कर रहे हैं कि अगर सही समय पर पंचनामा नहीं किया गया तो उन्हें मदद का लाभ नहीं मिलेगा। धान के खेत ही नहीं, चंद्रपुर जिले के सैकड़ों किसान सोयाबीन, कपास और अरहर जैसी फसलों को हुए नुकसान से दहशत में हैं।

लगातार भारी बारिश, खेतों में जलभराव और कीटों के प्रकोप के कारण उनकी आय आधे से भी कम होने की आशंका है। इसलिए किसानों को तुरंत पंचनामा बनाकर प्रभावित लोगों को सहायता प्रदान करनी चाहिए।

बीज और उर्वरक सब्सिडी पर उपलब्ध कराए जाने चाहिए। फसल बीमा योजना के तहत किसानों को उचित मुआवज़ा मिलना चाहिए। ऋण माफ़ी के साथ ब्याज मुक्त ऋण सोयाबीन और कपास उत्पादकों ने सुविधाओं की मांग की है।

किसानों ने कहा कि बीज और उर्वरकों के साथ ऊंची लागत लगाकर फसल उगाई थी। अब सब कुछ बर्बाद हो गया है।खरीफ सीज़न की मेहनत बर्बाद हो गई है। सवाल यह है कि परिवार की जिम्मेदारी कैसे पूरी की जाए। उम्मीद है कि सरकार तुरंत मदद करेगी।

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