चंद्रपुर बिजली केंद्र में 800 मेगावॉट की नई यूनिट का प्रस्ताव, कम कोयले में होगा ज्यादा उत्पादन
Chandrapur Thermal Power Station: चंद्रपुर महाऔष्णिक बिजली केंद्र में पुराने यूनिट 3 और 4 को चरणबद्ध तरीके से बंद कर 800 मेगावॉट की नई सुपर क्रिटिकल तकनीक आधारित यूनिट शुरू करने का प्रस्ताव रखा गया।
- Written By: आंचल लोखंडे
Chandrapur CTPS Power Plant (सोर्सः सोशल मीडिया)
Chandrapur CTPS Power Plant: चंद्रपुर महाऔष्णिक बिजली केंद्र, जिसका राज्य के बिजली उत्पादन में लगभग 33 प्रतिशत हिस्सा है, अभी 2920 मेगावॉट बिजली बना रहा है। लेकिन, क्योंकि यूनिट 3 और 4 की आयुसीमा खत्म हो रही है, इसलिए इन यूनिट्स को कुछ सालों में बंद करना होगा। इसके बजाय, 800 मेगावॉट क्षमता के अत्याधुनिक नये यूनिट के शुरू करने का प्रस्ताव होने की जानकारी बिजली केंद्र के मुख्य अभियंता अनिल काठोये ने दी। CTPS में यूनिट 1 और 2 बंद कर दी गई हैं, और यूनिट 3 और 4 को चरणबध्द रुप से बंद करने की योजना बनायी गयी है।
जब तक नई अत्याधुनिक यूनिट नहीं लग जाती, तब तक इस यूनिट से बिजली बनाई जाएगी, और ज़रूरत के हिसाब से इन यूनिट्स को अपग्रेड करके उत्पादन किया जाएगा। राज्य में बिजली की मांग को देखते हुए यह कदम उठाया जा रहा है ताकि बिजली उत्पादन पर असर न पड़े। सीई काठोये ने बताया कि प्रस्तावित 800 MW क्षमता सुपर क्रिटिकल या अल्ट्रा सुपर क्रिटिकल तकनीक पर आधारित होगी। इस बीच यह युनिट बिजली केंद्र में स्थापित होने पर राज्य का पहला ऐसा युनिट होगा, जिसमें यह तकनीक होगी ऐसा दावा भी – काठोये ने किया। इस अवसर पर उपमुख्य अभियंता अमित बनकर, सोनकुसरे व अधिक्षक अभियंता राजुरकर भी मौजूद थे।
कम कोयले में अधिक बिजलीः
प्रस्तावित 800 मेगावॉट यूनिट के लिए अत्याधुनिक तकनीक उपयोग में लाई जाएगी। जिसमें कम कोयले में अधिक उत्पादन के साथ प्रदूषण को भी कम किया जाएगा।
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विक्की राठौड़ को हटाया गया
निवृत्त मुख्य अभियंता विजय राठौड़ के समय में तकनीकी सहायक का पद बनाया गया था और विक्की राठौड़ को इसकी जिम्मेदारी दी गई थी। विक्की राठौड़ पर इस पद के जरिए बड़े पैमाने पर गड़बड़ी करने का भी आरोप था। स्थानीय ठेकेदार ने उनके खिलाफ विरोध प्रदर्शन का आह्वान किया था। इस बीच, उन्होंने बताया कि अनिल कठोये के मुख्य अभियंता के तौर पर पदभार संभालते ही विक्की राठौड़ को तकनीकी सहायक के पद से हटा दिया गया था। इस बीच, उन्होंने यह भी कहा कि इस पद की कोई जरूरत नहीं है और उनके पास कोई तकनीकी सहयोगी नहीं है।
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50 लाख मीट्रिक टन कोयला उपलब्ध
फिलहाल बिजली केंद्र में 50 लाख मीट्रिक टन कोयले का भंडार उपलब्ध है। प्रदूषण नियंत्रण के लिए इएसपी नियमित शुरु रखी जा रही है। इरई डैम से शहर के लिए अतिरिक्त पानी दिया जा रहा है। प्रदूषण का लेवल कम करने के लिए सीएसटीपीएस प्रबंधन की ओर से निरंतर प्रयास जारी है, ऐसी जानकारी भी उन्होंने इस समय दी।
