वायु प्रदुषण पर कोर्ट सख्त (AI Generated Image)
Nagpur Air Quality Index: नागपुर शहर में चल रहे निरंतर निर्माण कार्यों के कारण हवा में उड़ती धूल, सीमेंट और सूक्ष्म कणों ने नागपुर की वायु गुणवत्ता को खतरनाक स्तर पर पहुंचा दिया है। इस गंभीर स्थिति का संज्ञान लेते हुए हाई कोर्ट ने इसे जनहित याचिका के रूप में स्वीकार किया।
शुक्रवार को सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से तो हलफनामा दायर किया गया किंतु अन्य प्रतिवादियों से हलफनामा नहीं मिला। इस पर चिंता जताते हुए न्यायाधीश अनिल किलोर और न्यायाधीश राज वाकोडे ने सिटी कमेटी और स्टिएरिंग कमेटी को अब तक हुई बैठकों का ब्योरा देते हुए रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए।
अदालत मित्र के रूप में अधिवक्ता शांतनु खेडकर ने पैरवी की। राज्य सरकार की ओर से मुख्य सरकारी वकील देवेन चौहान, एजीपी एनएस राव, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से अधिवक्ता रवि सन्याल और मनपा की ओर से अधिवक्ता जैमिनी कासट ने पैरवी की।
अदालत मित्र ने बताया कि जुलाई 2024 में नीरी और आईआईटी बॉम्बे द्वारा नागपुर की वायु गुणवत्ता (Air Quality) पर एक संयुक्त रिपोर्ट पेश की गई थी। इस रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से कहा गया था कि शहर में जारी निर्माण परियोजनाएं, औद्योगिक उत्सर्जन और वाहनों से निकलने वाला धुआं प्रदूषण के मुख्य कारक हैं। रिपोर्ट में सुधार के लिए कई उपाय भी सुझाए गए थे लेकिन इन सिफारिशों पर अब तक कोई ठोस कार्यान्वयन नहीं किया गया है।
अदालत का ध्यानाकर्षित करते हुए बताया गया कि केंद्र सरकार के ‘नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम’ के तहत जिलाधिकारी और मनपा आयुक्त के नेतृत्व में गठित प्रदूषण नियंत्रण समिति पूरी तरह निष्क्रिय है। इस समिति को हर महीने बैठकें कर रिपोर्ट तैयार करनी थी लेकिन इसकी लापरवाही का खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है।
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शहर में बढ़ते वायु प्रदूषण (Air Pollution) के कारण नागरिकों में श्वसन रोग, दमा (अस्थमा) और सीने में संक्रमण के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। दोनों पक्षो की दलीलों के बाद हाई कोर्ट ने इन सभी तथ्यों को गंभीरता से लेते हुए प्रशासन से जवाब तलब किया है। पिछली रिपोर्ट की सिफारिशों पर अब तक क्या कार्रवाई की गई है और प्रदूषण नियंत्रण समिति के कामकाज का पूरा लेखाजोखा प्रस्तुत करने का आदेश हाई कोर्ट ने दिया।