मनरेगा बचाने सड़क पर उतरी कांग्रेस, चंद्रपुर में उपवास रखकर किया विरोध प्रदर्शन

Chandrapur News: चंद्रपुर में कांग्रेस ने मनरेगा बचाओ आंदोलन के तहत एकदिवसीय उपवास किया। नेताओं ने केंद्र सरकार पर मनरेगा की उपेक्षा का आरोप लगाते हुए निधि बढ़ाने और मजदूरी समय पर देने की मांग की।
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मनरेगा बचाओ अभियान के तहत प्रदर्शन करते कांग्रेस कार्यकर्ता (सोर्स: सोशल मीडिया)
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Chandrapur Congress Protest: चंद्रपुर शहर के प्रियदर्शनी इंदिरा गांधी प्रतिमा स्थल पर जिला कांग्रेस की ओर से महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) को बचाने के लिए रविवार को एकदिवसीय प्रतीकात्मक उपवास किया गया। महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस के मनरेगा बचाओ राज्यव्यापी आंदोलन की पृष्ठभूमि में जिला व शहर कांग्रेस तथा जिले के सभी फ्रंटल संगठनों के संयुक्त तत्वावधान में यह आंदोलन आयोजित किया गया। आंदोलन की शुरुआत प्रियदर्शनी इंदिरा गांधी की प्रतिमा पर पुष्पहार अर्पित कर विनम्र अभिवादन के साथ की गई।

इस अवसर पर उपस्थित नेताओं ने केंद्र सरकार की मनरेगा से जुड़ी कथित उपेक्षापूर्ण नीतियों की तीखी आलोचना की। नेताओं ने कहा कि मनरेगा ग्रामीण गरीबों, मजदूरों, खेत मजदूरों और बेरोजगारों के लिए जीवनरेखा है, लेकिन निधि में कटौती, कार्यों की सीमा और मजदूरी के भुगतान में देरी के कारण लाभार्थियों के साथ अन्याय हो रहा है।

मनरेगा की मजदूरी समय पर दें

कांग्रेस ने मनरेगा के लिए पर्याप्त निधि तत्काल उपलब्ध कराने, कार्यों की संख्या बढ़ाने और मजदूरी समय पर देने की मांग की। साथ ही चेतावनी दी गई कि यदि केंद्र सरकार ने मनरेगा को कमजोर करने की नीति नहीं रोकी, तो आंदोलन को और तीव्र किया जाएगा।

सांसद प्रतिभा धानोरकर ने की अगुआई

इस आंदोलन में सांसद प्रतिभा धानोरकर, कांग्रेस के जिला अध्यक्ष व पूर्व विधायक सुभाष धोटे, वरिष्ठ नेता संतोषसिंह रावत, पूर्व जिला अध्यक्ष विनायक बांगडे, सुभाषसिंह गौर, रामू तिवारी, विनोद दत्तात्रय, प्रवीण पडवेकर, राजुरा के नगराध्यक्ष अरुण धोटे, बल्लारपुर की नगराध्यक्षा डॉ। अल्का वाढई, अंबिका प्रसाद दवे, महिला कांग्रेस जिला अध्यक्ष कुंदा जेनेकर, युवक कांग्रेस जिला अध्यक्ष शंतनू धोटे, सभापति विकास देवालकर सहित कई कार्यकर्ता शामिल थे।

मनरेगा और ‘VB-G RAM G’ में अंतर

नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली केंद्र सरकार ग्रामीण भारत के लिए रोजगार की नई व्यवस्था ‘विकसित भारत रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) गारंटी विधियेक को पास कर दिया है। यह नया कानून 20 साल पुराने मनरेगा (MGNREGA) की जगह लेगा। नए कानून का मकदस न केवल रोजगार देना है, बल्कि गांवों के ढांचे को आधुनिक और विकसित भारत के विजन के साथ जोड़ना है।

पुराने मनरेगा कानून में ग्रामीण परिवारों को साल में कम से कम 100 दिनों के अकुशल काम की गारंटी दी जाती थी। नए VB-GRAM G बिल में इस सीमा को बढ़ाकर 125 दिन कर दिया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य ‘विकसित भारत @2047’ के लक्ष्य को हासिल करना है। जहां पुराना कानून सिर्फ रोजगार पैदा करने पर ध्यान देता था, वहीं नया बिल गांवों को समृद्ध, सशक्त और हर मुसीबत से लड़ने के लिए तैयार (लचीला) बनाने पर केंद्रित है।

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