बुलढाणा में मातम: शादी न होने से टूटे 2 युवकों ने दी जान; बेरोजगारी और गरीबी बनी ‘दुश्मन’
Buldhana Youth Depression Suicide: बुलढाणा में शादी न होने और बेरोजगारी के कारण 2 युवकों ने की आत्महत्या। सोनाला और मंगरुल गांव में शोक की लहर। जांच जारी।
- Written By: अनिल सिंह
Buldhana Youth Depression Suicide (डिजाइन फोटो)
Buldhana Youth Suicide: महाराष्ट्र के बुलढाणा जिले से एक हृदयविदारक खबर सामने आई है, जिसने राज्य में बढ़ती बेरोजगारी और विवाह न हो पाने की बढ़ती सामाजिक समस्या को फिर से चर्चा के केंद्र में ला दिया है। पिछले पांच दिनों के भीतर जिले में दो अलग-अलग घटनाओं में दो युवकों ने वैवाहिक संबंध तय न हो पाने और उसके कारण उपजे अवसाद (Depression) के चलते आत्महत्या कर ली। ये घटनाएं संग्रामपुर तालुका के सोनाला और चिखली तालुका के मंगरुल गांव में घटी हैं।
पहली घटना सोनाला की है, जहाँ 28 वर्षीय हरीश वानखेड़े ने अपने घर में फांसी लगाकर जीवनलीला समाप्त कर ली। हरीश एक अत्यंत गरीब और भूमिहीन परिवार से ताल्लुक रखता था। बताया जा रहा है कि उसके पिता पिछले दो-तीन वर्षों से उसके लिए रिश्ता तलाश रहे थे, लेकिन परिवार की दयनीय आर्थिक स्थिति और स्थाई आय का स्रोत न होने के कारण कोई भी उसे लड़की देने को तैयार नहीं था। जब परिवार के सदस्य काम पर बाहर गए थे, तब हरीश ने यह खौफनाक कदम उठाया।
नशा और बेरोजगारी का घातक चक्र
दूसरी घटना चिखली तालुका के मंगरुल की है। यहाँ 25 वर्षीय सत्यपाल भीसे नामक युवक ने पेड़ से लटककर अपनी जान दे दी। सत्यपाल पढ़ाई-लिखाई में निपुण था, लेकिन डिग्री होने के बावजूद उसे मनचाही नौकरी नहीं मिल पा रही थी। दोस्तों की शादी होने और खुद के लिए कोई प्रस्ताव न आने के कारण वह गहरे तनाव में था। इस हताशा के कारण वह नशे का आदी हो गया और अंततः उसने सिलाई का काम शुरू किया था, लेकिन मानसिक शांति न मिलने पर उसने मौत को गले लगा लिया।
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सामाजिक संकट बनती ‘शादी’ की समस्या
इन दोनों घटनाओं ने ग्रामीण महाराष्ट्र में एक गंभीर सामाजिक संकट की ओर इशारा किया है। विशेष रूप से कृषि क्षेत्र में अनिश्चितता और औद्योगिक रोजगार की कमी के कारण ग्रामीण युवाओं के लिए ‘शादी’ एक बड़ी चुनौती बनती जा रही है। लड़कियों के परिवार अब खेती करने वाले या अस्थाई काम करने वाले युवकों के बजाय सुरक्षित सरकारी या निजी नौकरी वाले लड़कों को प्राथमिकता दे रहे हैं। प्रशासन और समाजशास्त्रियों के लिए यह चिंता का विषय है कि बेरोजगारी अब केवल आर्थिक ही नहीं, बल्कि पारिवारिक और मानसिक संकट का रूप ले रही है।
प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग
बुलढाणा पुलिस ने दोनों ही मामलों में आकस्मिक मृत्यु (ADR) दर्ज की है। वहीं, स्थानीय नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने सरकार से मांग की है कि युवा बेरोजगारी के साथ-साथ इस सामाजिक अलगाव की समस्या पर भी गंभीरता से विचार किया जाए। युवाओं में बढ़ते नशे और आत्महत्या की प्रवृत्तियों को रोकने के लिए मानसिक परामर्श केंद्र और रोजगार सृजन की तत्काल आवश्यकता है।
