Bhandara News: बेमौसम बारिश से 413.80 हेक्टेयर में फैले फसल का नुकसान, 49 गांवों के 942 किसान प्रभावित

मई महीने में हुई बेमौसम और मानसून पूर्व बारिश ने भंडारा जिले के किसानों को भारी नुकसान पहुंचाया है। इसमें मुख्य रूप से धान, सब्जियां और फल फसलें शामिल हैं।
बेमौसम बारिश से 413.80 हेक्टेयर में फैले फसल का नुकसान
बेमौसम बारिश से 413.80 हेक्टेयर में फैले फसल का नुकसान (सौजन्यः सोशल मीडिया)
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भंडारा: मई महीने में हुई बेमौसम और मानसून पूर्व बारिश ने भंडारा जिले के किसानों को भारी नुकसान पहुंचाया है। 26 से 30 मई के बीच हुई इस बारिश से जिले के चार तहसीलों, जिसमें भंडारा, पवनी, लाखनी और लाखांदुर के 49 गांवों के 942 किसानों की 413.80 हेक्टेयर क्षेत्र की ग्रीष्मकालीन फसलों को नुकसान हुआ है।

इसमें मुख्य रूप से धान, सब्जियां और फल फसलें शामिल हैं। प्रशासन की प्रारंभिक रिपोर्ट के अनुसार, अब तक 413.80 हेक्टेयर क्षेत्र की फसलों को नुकसान हुआ है, लेकिन वास्तविक पंचनामा के बाद यह आंकड़ा और बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।

कहां हुआ कितना नुकसान

तहसील अनुसार क्षति का विवरण सामने आया है। इसमें भंडारा तहसील में 6,954 हेक्टेयर में बुआई हुई थी, जिसमें से 16 गांवों के 214 किसानों की 95.80 हेक्टेयर फसलें प्रभावित हुई हैं। लाखनी तहसील में कुल 6,402 हेक्टेयर क्षेत्र में बुआई हुई थी। यहां 5 गांवों के 67 किसानों की 20 हेक्टेयर फसल को नुकसान पहुंचा है। पवनी तहसील में 14,870 हेक्टेयर क्षेत्र में फसलें लगाई गई थीं। इसमें से 10 गांवों के 196 किसानों की 108 हेक्टेयर फसलें क्षतिग्रस्त हुई हैं। राज्य में 12 दिन पहले पहुंचे मानसून की रुकी यात्रा, पूर्वोत्तर भारत में बारिश ही बारिश

लाखांदुर में सबसे ज्यादा क्षति

मोहाड़ी, साकोली और तुमसर तहसील के क्षेत्रों में किसी भी प्रकार की फसल क्षति दर्ज नहीं की गई है। लाखांदुर तहसील में सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है। यहां 18 गांवों के 465 किसानों की 190 हेक्टेयर फसलों को नुकसान पहुंचा है। बारिश के कारण काटी गई फसल और धान भीग गए, जिससे किसानों को दोहरी मार झेलनी पड़ी। जिले में ग्रीष्मकालीन सीजन में कुल 71,221 हेक्टेयर क्षेत्र में विविध फसलों की बुआई की गई। इससे पहले 19 से 25 मई के बीच हुई बारिश से भी लगभग 2,072 किसानों की 977 हेक्टेयर फसलें प्रभावित हुईं।

पंचनामे के बाद नुकसान बढ़ेगा

प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यह नुकसान प्राथमिक आकलन पर आधारित है, और पंचनामे के बाद इसमें बदलाव हो सकता है। किसानों की ओर से सहायता की मांग तेज हो रही है, जिसे देखते हुए प्रशासन ने शीघ्र ही पंचनामा प्रक्रिया पूरी कर रिपोर्ट तैयार करने का आश्वासन दिया है।

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