भंडारा जिले की आंगनवाड़ियां बनेंगी स्मार्ट, 945 केंद्र हुए डिजिटल, 74,000 से अधिक बच्चों को लाभ
Bhandara Smart Anganwadi: भंडारा जिले में 945 आंगनवाड़ियों को स्मार्ट बनाया गया है, जिससे 74 हजार से अधिक बच्चों को आधुनिक पूर्व-प्राथमिक शिक्षा का लाभ मिल रहा है।
- Written By: आंचल लोखंडे
digital anganwadi (सोर्सः सोशल मीडिया)
Bhandara Child Development: ग्रामीण और दुर्गम क्षेत्रों में पूर्व-प्राथमिक शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के उद्देश्य से जिले में आंगनवाड़ियों को स्मार्ट बनाने की पहल तेज कर दी गई है। कुल 1,417 आंगनवाड़ियों में से 945 केंद्रों को डिजिटल और स्मार्ट आंगनवाड़ी के रूप में विकसित किया जा चुका है। इन केंद्रों में शैक्षणिक रंग-रोगन, बोलती चित्रकला, स्मार्ट टीवी, ई-लर्निंग सामग्री और आकर्षक शिक्षण साधन उपलब्ध कराए गए हैं।
प्रशासन के अनुसार, इन सुधारों से बच्चों की नियमित उपस्थिति में 70 से 80 प्रतिशत तक वृद्धि दर्ज की गई है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में 60 अतिरिक्त आंगनवाड़ियों को स्मार्ट केंद्र के रूप में विकसित करने की मंजूरी भी मिल चुकी है।
14 करोड़ रुपये से अधिक का निधि मंजूर
आधारभूत ढांचे को मजबूत करने के लिए राज्य सरकार और जिला नियोजन समिति ने 14 करोड़ रुपये से अधिक की निधि स्वीकृत की है। वर्तमान में 1,231 आंगनवाड़ियों की अपनी इमारत है, जबकि 117 केंद्र किराए के भवनों में संचालित हो रहे हैं।
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वर्ष 2025-26 और 2026-27 में 109 नई इमारतों के निर्माण को मंजूरी दी गई है। इसके लिए जिला नियोजन समिति से 292.50 लाख रुपये और राज्य सरकार से 1,126.25 लाख रुपये, यानी कुल 1,418.75 लाख रुपये का प्रावधान किया गया है। नई इमारतों के निर्माण से किराए की समस्या दूर होने की उम्मीद है।
56 भवन जर्जर, मरम्मत के लिए निधि मंजूर
जिले में 56 आंगनवाड़ी भवन जर्जर और असुरक्षित स्थिति में हैं। इनके मरम्मत कार्य के लिए 112 लाख रुपये स्वीकृत किए गए हैं। बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए इन केंद्रों को अस्थायी रूप से नजदीकी जिला परिषद स्कूलों में स्थानांतरित किया गया है, ताकि शिक्षा बाधित न हो।
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मानव संसाधन की दृष्टि से 1,252 सेविका पदों में से 1,239 भरे हुए हैं, जबकि 13 पद रिक्त हैं। मदतनीस के 1,252 पदों में से 1,197 कार्यरत हैं और 55 पद खाली हैं। रिक्त पदों को भरने की प्रक्रिया जारी है। जिले में 0 से 6 वर्ष आयु वर्ग के 74,940 बच्चे पंजीकृत हैं। प्रशासन का मानना है कि स्मार्ट आंगनवाड़ी पहल से बाल शिक्षा में दीर्घकालीन सकारात्मक परिवर्तन आएगा।
