Bhandara News: लाखांदुर में ग्रीष्मकालीन धान के भुगतान अटके, किसानों पर आर्थिक संकट
Lakhandur Paddy Payment: लाखांदुर तहसील में ग्रीष्मकालीन धान खरीदी के बाद लगभग एक माह से किसानों को भुगतान नहीं मिला है, जिससे हजारों किसान आर्थिक संकट में हैं और खरीफ बुवाई प्रभावित हो रही है।
Farmer Crisis (सोर्सः फाइल फोटो-सोशल मीडिया)
Bhandara Farmers Crisis: सरकार के न्यूनतम समर्थन मूल्य योजना के तहत इस वर्ष किसानों से खरीदे गए लाखों क्विंटल धान के पिछले लगभग 1 माह से चुकारे अदा नहीं किए गए है। जिसके कारण तहसील के हजारों धान उत्पादक किसान आर्थिक संकट में फंसे हुए है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, हर वर्ष सरकार के न्यूनतम समर्थन मूल्य योजना के तहत किसानों के ग्रीष्मकालीन धान फसलों के खरीदे के लिए बुनियादी केंद्र मंजूर किए जाते है।
धान समर्थन मूल्य योजना में देरी
उक्त केंद्रों के तहत सरकार नियमों के अनुसार किसानों के धान की खरीदी भी की जाती है। इस वर्ष इस योजना के तहत तहसील के विभिन्न क्षेत्र में पर्याप्त मात्रा में धान खरीदी केंद्र मंजूर किए गए थे। इस मंजूरी के अनुसार सभी बुनियादी केंद्रों के तहत लाखों क्विंटल ग्रीष्मकालीन धान की खरीदी पूर्ण की गई है। इस खरीदी के अनुसार पिछले 23 मई तक किसानों से खरीदे गए धान के चुकारे अदा किए है।
किसानों ने की तुरंत भुगतान की मांग
जबकि 23 मई के बाद किसानों से खरीदे गए लाखों क्विंटल धान के चुकारे शेष हैं। बताया जाता है कि विभिन्न फसल कर्जों के आधार पर खरीफ एवं रबी में धान सहित अन्य विभिन्न फसलों की बुआई एवं रोपाई कर रहे किसानों को विहित अवधि में उत्पादित फसल के चुकारे अदा नहीं होने पर बड़ी मात्रा में आर्थिक संकट का सामना करना पड़ता है। हालांकि रबी के ग्रीष्मकालीन धान फसलों के उत्पादन के तहत उक्त फसलों के चुकारे पर निर्भर किसान खरीफ फसलों की बुआई करते है।
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इस वर्ष खरीफ शुरू होने के कुल 1 महीना बाद बारिश होने पर खरीफ फसलों के बुआई एवं रोपाई में विलंब होने की चर्चा है। इसके बावजूद पिछले ग्रीष्मकालीन धान फसलों के चुकारे अदा नहीं होने के कारण खरीफ फसलों की बुआई एवं रोपाई प्रभावित हुई है। इस स्थिति में सरकार एवं विपणन विभाग ने तुरंत पहल कर आर्थिक संकट में फंसे किसानों के बकाया चुकारे तुरंत अदा होने के लिए आवश्यक कार्रवाई की मांग की जा रही है।
