

Nagpur Aapli Bus E-Bus NMC Transport: नागपुर सिटी में प्रदूषण कम करने के साथ ही शहरवासियों को अत्याधुनिक और एसी बसों की परिवहन सेवा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से डीजल बसों के बदले 2 वर्षों के भीतर 850 ई-बसें बेड़े में शामिल करने की भले ही कवायद हो रही हो, लेकिन इसी बीच इन बसों के संचालन के लिए नियुक्त होने वाली कम्पनियों की मनमानी पर लगाम कसने के कोई उपाय नहीं हो रहे हैं।
एक ओर जहां आपली बसों का संचालन पूरी तरह से निजी कम्पनियों के हाथों में दिया जा रहा है, तो दूसरी ओर इस कम्पनी की ओर से नियुक्त ड्राइवर द्वारा एक्सीडेंट किए जाने के बावजूद जुर्माना मनपा को भरना पड़ रहा है। आश्चर्यजनक यह कि जिस समय कम्पनी के साथ एग्रीमेंट किया गया, उस समय ऐसे जुर्माना को लेकर क्या प्रावधान किए गए, इसकी जानकारी तक परिवहन के किसी अधिकारी के पास नहीं है।
परिवहन विभाग के अधिकारियों की मानें तो इन बसों का संचालन कर रही कम्पनी चलो एप ही ड्राइवरों की नियुक्ति कर रही है। हालांकि बस ड्राइवर के लिए 3 वर्ष बस चालन का अनुभव होने की योग्यता अनिवार्य तो है, लेकिन आपली बस के अधिकांश चालक ट्रक ड्राइवर हैं।
आरटीओ के नियमों के अनुसार बसों को चलाने के लिए ड्राइवर के पास बैज-बिल्ला भी होना चाहिए किंतु इन ड्राइवर के पास बैज है या नहीं, इसकी भी जानकारी अधिकारियों के पास नहीं है। आलम यह है कि निजी कम्पनी चलो एप द्वारा ही पूरा संचालन देखे जाने का हवाला देकर अधिकारी अपनी जिम्मेदारियों से पल्ला झाड़ रहे हैं।
जानकारों की मानें तो परिवहन विभाग में सर्वाधिक अधिकारी या तो मनपा से रिटायर होने के बाद सेवाएं दे रहे हैं या फिर कॉन्ट्रैक्ट पर नियुक्त किए गए हैं। यही कारण है कि मनपा की सम्पत्ति का उचित ध्यान नहीं रखा जा रहा है।
परिवहन विभाग की बेतरतीब कार्यप्रणाली का आलम यह है कि बस ड्राइवर की रैश ड्राइविंग के चलते इन दिनों कई दुर्घटनाएं हो रही हैं। मनपा के हो रहे नुकसान का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि दुर्घटना होने के बाद यदि पीड़ितों की ओर से कोई दुर्घटना दावा किया जाता है तो इसकी राशि सर्वप्रथम मनपा की ओर से कोर्ट में जमा की जाती है।
हाल ही में इस संदर्भ में हुए खुलासे में अधिकारियों का मानना है कि चूंकि बसों की मालिक महानगर पालिका है, अतः जुर्माना की राशि भी उसे ही भरनी होती है किंतु निजी कम्पनी के हाथों में बसों को देते समय क्या यह जिम्मेदारी कम्पनी पर डाली गई या नहीं, इसे लेकर अधिकारियों के पास कोई जवाब नहीं है।
परिवहन विभाग के अधिकारियों के पास क्या काम है, इन दिनों खोज का विषय बना हुआ है। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि एक ओर जहां बसों का संचालन करने की जिम्मेदारी चलो एप कम्पनी को दी गई है, वहीं बस स्टाप की जिम्मेदारी साइन पोस्ट नामक कम्पनी को दी गई है।
जिस तरह से कचरा संकलन कम्पनी द्वारा अपना काम ठीक ढंग से नहीं किया जा रहा है, उसी तरह से बस परिवहन का काम भी इन दोनों कम्पनियों के बस में नहीं है। साइन पोस्ट कम्पनी को बस स्टाप तैयार करते समय वहां पर विकलांगों के लिए रैम्प तैयार करने को कहा गया था।
अधिकारियों की मानें तो एग्रीमेंट में ही इसका उल्लेख किया गया। अब अगले माह एग्रीमेंट खत्म होने आ रहा है किंतु एक भी बस स्टाप पर रैम्प तैयार नहीं हैं जबकि इसे लेकर हाई कोर्ट की ओर से कड़े आदेश जारी किए जा रहे हैं। एक माह बाद कम्पनी अपनी जिम्मेदारियों से पल्ला झाड़ लेगी जबकि मनपा को रैम्प बनाने के लिए लाखों रुपए खर्च करने होंगे।
1.मनपा में न केवल विरोधी पक्ष बल्कि सत्ता पक्ष के भी कई पार्षदों का मानना है कि परिवहन विभाग में कई तरह की मनमानी जारी है।
2.परिवहन समिति का न तो प्रशासन और न ही बस संचालन और उसकी सेवाओं तथा कम्पनी की कार्यप्रणाली पर है।
3.यही कारण है कि जहां बसों के संचालन से निजी कम्पनियां करोड़ों रुपए कमा रही है, वहीं बस संचालन के लिए महानगर पालिका 200 करोड़ का अतिरिक्त बोझ ढो रही है।