कमकासुर में गहराया जल संकट, एक ही कुएं पर निर्भर 300 ग्रामीण, दो बोरवेल बंद
Kamkasur Water Crisis: कमकासुर गांव में दो बोरवेल बंद होने के कारण 300 की आबादी एक ही कुएं पर निर्भर है, जिससे भीषण गर्मी में जल संकट गहराता जा रहा है और ग्रामीणों ने प्रशासन से समाधान की मांग की है।
kamkasur water (सोर्सः फाइल फोटो- सोशल मीडिया)
Bhandara Water Shortage: भंडारा जिले के तुमसर तहसील अंतर्गत पुनर्वसित गांव कमकासुर में पेयजल संकट की गंभीर स्थिति सामने आई है। करीब 300 की आबादी वाला यह गांव इस समय केवल एक ही कुएं पर निर्भर है, जबकि गांव में लगाए गए दो बोरवेल पूरी तरह बंद हो चुके हैं। इससे ग्रामीणों के सामने रोजमर्रा की पानी की जरूरत पूरी करना भी बड़ी चुनौती बन गया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, कमकासुर गांव का पुनर्वास तो किया गया, लेकिन यहां मूलभूत सुविधाओं का पर्याप्त विकास नहीं हो सका। विशेष रूप से पेयजल व्यवस्था पूरी तरह चरमराई हुई है। गांव में मौजूद दोनों बोरवेल या तो तकनीकी खराबी के कारण बंद पड़े हैं या फिर भूजल स्तर नीचे चले जाने से निष्क्रिय हो गए हैं। ऐसे में एकमात्र कुआं ही गांव के सैकड़ों लोगों के लिए पानी का सहारा बना हुआ है।
लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही
स्थिति यह है कि सुबह होते ही कुएं पर महिलाओं और बच्चों की लंबी कतारें लग जाती हैं। पानी भरने के लिए लोगों को घंटों इंतजार करना पड़ता है। कई बार तो पानी के लिए आपसी कहासुनी की नौबत भी आ जाती है। भीषण गर्मी के कारण पानी की उपलब्धता और कम हो रही है, जिससे संकट और गहरा गया है। ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने कई बार संबंधित विभाग और प्रशासन को इस समस्या से अवगत कराया है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। इससे लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।
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रोजाना कई चक्कर लगाकर पानी लाना पड़ता है
गांव की महिलाओं को रोजाना कई चक्कर लगाकर पानी लाना पड़ता है, जिससे उनका अधिकांश समय इसी काम में निकल जाता है। पानी की कमी का असर पशुओं के लिए भी पर्याप्त पानी उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। इससे ग्रामीणों की आजीविका पर भी असर पड़ने लगा है।
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ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि बंद पड़े बोरवेल को जल्द से जल्द दुरुस्त किया जाए या नई जल आपूर्ति योजना शुरू की जाए। उनका कहना है कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो आने वाले दिनों में स्थिति और गंभीर हो सकती है। फिलहाल कमकासुर गांव के लोग एक ही कुएं के सहारे जीवन यापन कर रहे हैं और प्रशासन से त्वरित मदद की उम्मीद लगाए बैठे हैं।
