जल जीवन मिशन की रफ्तार थमी: 12 करोड़ की योजनाएं अधूरी, 8,500 घर अब भी नल कनेक्शन से वंचित

Maregaon Jal Jeevan Mission: मारेगांव में जल जीवन मिशन की करोड़ों की योजनाएं निधि अभाव से धीमी। 10 हजार घरों के लक्ष्य के मुकाबले केवल 1500 कनेक्शन, हजारों ग्रामीण अब भी इंतजार में।
Jal Jeevan Mission Slows Down: Projects Worth ₹12 Crore Incomplete; 8,500 Households Still Deprived of Tap Connections
जल जीवन मिशन मारेगांव,(प्रतिकात्मक तस्वीर सोर्स: सोशल मीडिया)
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Maregaon Rural Water Supply Crisis: मारेगांव तहसील में जल जीवन मिशन के तहत शुरू की गई करोड़ों रुपये की पेयजल योजनाएं निधि के अभाव में धीमी पड़ गई हैं। पिछले दो वर्षों में अपेक्षित प्रगति नहीं होने के कारण कई गांवों और बस्तियों के नागरिक आज भी नल कनेक्शन का इंतजार कर रहे हैं। ग्रामीणों ने सरकार से जल्द निधि उपलब्ध कराने की मांग की है। ग्रामीण जल आपूर्ति विभाग, जिला परिषद यवतमाल के मारेगांव उपविभाग अंतर्गत 57 ग्राम पंचायतों के 108 गांवों और बस्तियों में लगभग 12 करोड़ रुपये की लागत से पानी टंकी निर्माण और पाइपलाइन बिछाने का कार्य शुरू किया गया था।

इनमें से केवल 15 कार्य पूर्ण हुए हैं और इन्हें ग्राम पंचायतों को सौंप दिया गया है। इस योजना के तहत लगभग 10 हजार घरों को नल कनेक्शन देने का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन अब तक केवल 1500 घरों तक ही कनेक्शन पहुंच पाया है, जबकि 8500 लाभार्थी अभी भी वंचित हैं। जल जीवन मिशन केंद्र सरकार की एक महत्वाकांक्षी योजना है, जिसका उद्देश्य हर घर तक स्वच्छ और पर्याप्त पेयजल पहुंचाना है।

वर्ष 2019 में इसकी घोषणा हुई और 2021 से तालुका में काम शुरू हुआ। ग्रामीण क्षेत्रों में इस योजना से पानी की समस्या खत्म होने की उम्मीद जगी थी, लेकिन निधि की कमी के कारण कार्य अपेक्षित गति से पूरे नहीं हो सके। कई स्थानों पर टंकी और पाइपलाइन का काम लगभग पूरा हो चुका है, लेकिन करीब 30 प्रतिशत कार्य अधूरे हैं।

यदि ये कार्य पूरे कर योजनाओं को चालू किया जाए, तो समस्या स्थायी रूप से खत्म हो सकती है। हर साल जल आपूर्ति विभाग को पानी की कमी से निपटने के लिए लाखों रुपये खर्च करने पड़ते हैं। यदि जल जीवन मिशन के सभी कार्य पूरे हो जाएं, तो इस खर्च में बड़ी बचत हो सकती है।

हर साल पानी संकट पर होता है लाखों का खर्च

तालुका के 93 स्थानों पर नल योजनाएं अधूरी पड़ी है, जिससे इन गांवों को पानी की कमी का सामना करना पड़ रहा है। 37 जल संकटग्रस्त क्षेत्रों में बोरवेल और कुओं के अधिग्रहण के लिए 29 लाख रूपये की मांग की गई है, जबकि 19 स्थानों पर जलस्रोत गहरीकरण को मंजूरी मिली है। यह जानकारी जल जीवन मिशन के उपविभागीय अभियंता नीलकंठ करों ने दी।

परियोजना के ठेकेदार भी आर्थिक संकट में फंसे

जल जीवन मिशन के अंतर्गत कार्य करने वाले ठेकेदार भी आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं। महंगाई के कारण निर्माण सामग्री की लागत बढ़ गई है, जिससे परियोजनाओं का बजट प्रभावित हो रहा है और कई कार्य रुक गए हैं। ठेकेदारों ने मांग की है कि योजनाओं को समय पर पूरा करने के लिए आवश्यक निधि जल्द उपलब्ध कराई जाए,

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