सांसद पडोले ने लोकसभा में उठाई गोंदिया-भंडारा की मांग, पुनर्वास पीड़ितों की समस्याएं प्रमुखता से रखी

Prashant Padole: सांसद प्रशांत पडोले ने लोकसभा में भंडारा और गोंदिया जिले के पुनर्वास प्रभावित नागरिकों की समस्याओं को उठाते हुए गोसीखुर्द परियोजना, नदी कटाव और पुनर्वसन की देरी पर ध्यान आकर्षित किया।
सांसद पडोले ने लोकसभा में उठाई गोंदिया-भंडारा की मांग
सांसद पडोले ने लोकसभा में उठाई गोंदिया-भंडारा की मांग (सौजन्यः सोशल मीडिया)
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Gondia Rehabilitation: सांसद डॉ. प्रशांत पडोले ने लोकसभा के शून्यकाल के दौरान भंडारा और गोंदिया जिले के पुनर्वास प्रभावित नागरिकों की गंभीर समस्याओं को प्रभावी ढंग से उठाते हुए सरकार का ध्यान आकर्षित किया।

उन्होंने कहा कि वे अपने क्षेत्र के उन हजारों नागरिकों का दर्द सदन में व्यक्त कर रहे हैं, जो पिछले चार दशकों से पुनर्वसन से जुड़े संकटों का सामना कर रहे हैं। डॉ. पडोले ने बताया कि गोसीखुर्द बांध, वन विभाग की नई परियोजनाएँ तथा नदियों के कटाव के कारण बड़ी संख्या में लोगों की जमीनें खत्म हो गईं, लेकिन इनके पुनर्वसन की व्यवस्था आज तक संतोषजनक नहीं हो पाई है।

गोंदिया जिले के पीड़ितों की भी उठाई आवाज

डॉ. पडोले ने गोंदिया जिले के श्रीरामनगर और कालीमाटी के पुनर्वास पीड़ित नागरिकों की समस्याओं का विशेष रूप से उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि यहाँ के लोग 14 वर्षों से वनवास जैसी स्थिति में जीवन बिताने को मजबूर हैं। अधिकांश निवासी आदिवासी समुदाय से हैं, जिनकी समस्याओं की लगातार उपेक्षा की जा रही है।

सांसद ने कहा कि इन प्रभावित परिवारों को स्थायी आवास, बिजली, पानी, सड़क और अन्य मूलभूत सुविधाएँ उपलब्ध नहीं हैं, जो अत्यंत चिंताजनक और दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने प्रधानमंत्री से आग्रह किया कि वे महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को निर्देशित करें ताकि पुनर्वास से जुड़े सभी लंबित मुद्दों का जल्द समाधान हो सके। अंत में डॉ. पडोले ने आशा व्यक्त की कि सरकार पुनर्वास प्रभावित नागरिकों की समस्याओं को प्राथमिकता देकर उन्हें न्याय प्रदान करेगी।

क्षेत्र का दौरा करें, तब समझ आएगी सच्चाई

सांसद ने भंडारा जिले के करचखेड़ा और कारधा जैसे पुनर्वसित इलाकों की दयनीय स्थितियों का उल्लेख करते हुए कहा कि जरा आकर देखें, लोग किस कठिन परिस्थिति में जीवन बिता रहे हैं। हल्की बारिश होते ही सांप-बिच्छू निकल आते हैं, रहने की उपयुक्त जगह नहीं है, बिजली का अभाव है और लोग टूटे-फूटे, जर्जर मकानों में रहने को मजबूर हैं।

उन्होंने कहा कि इन नागरिकों को घरकुल जैसी बुनियादी सुविधाएँ भी उपलब्ध नहीं हैं। सांसद ने मांग की कि पुनर्वसित नागरिकों की समस्याओं का तत्काल समाधान किया जाए और उन्हें सम्मानजनक जीवन के लिए जरूरी सुविधाएँ प्रदान की जाएँ।

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