नए चेहरों की मांग- पुराने से मोहभंग (सौजन्यः सोशल मीडिया)
Bhandara Politics: आगामी नगर परिषद चुनाव को लेकर शहर में इस बार अलग ही माहौल देखने को मिल रहा है। अब तक राजनीतिक दलों द्वारा बार-बार एक ही पुराने चेहरों को चुनाव मैदान में उतारने की परंपरा पर नागरिक सवाल उठा रहे हैं। शहर में यह चर्चा तेज है कि यदि युवा, सक्षम और नए चेहरों को मौका दिया जाए, तो शहर के विकास की दिशा पूरी तरह बदल सकती है।
स्थानीय नागरिकों और जानकारों का कहना है कि वर्षों से सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ही दल एक जैसे उम्मीदवारों को उतारते रहे हैं। कई नेताओं ने दल बदलकर अपनी सक्रियता बनाए रखी है, लेकिन इसके बावजूद शहर की बुनियादी समस्याओं पर कोई ठोस काम नहीं हुआ है। सड़कों की बदहाली, बढ़ता अतिक्रमण, कचरे के ढेर और यातायात अव्यवस्था जैसी समस्याएँ पहले से अधिक गंभीर होती जा रही हैं। अब तक चुने गए जनप्रतिनिधियों की निष्क्रियता का खामियाजा शहरवासी लगातार भुगत रहे हैं।
शहर में बढ़ते अतिक्रमण के कारण कई स्थानों पर पैदल चलना भी मुश्किल हो गया है। सड़कें संकरी होती जा रही हैं और यातायात व्यवस्था चरमराई हुई है। नागरिक ऐसे नेतृत्व की प्रतीक्षा कर रहे हैं, जो साहसिक निर्णय लेकर अतिक्रमण हटाए और शहर को व्यवस्थित करे। कूड़े के ढेर बदबू व स्वास्थ्य समस्याओं को जन्म दे रहे हैं, जबकि आवारा कुत्ते और पशुओं की समस्या भी गंभीर रूप ले चुकी है। नगर परिषद की बकाया वसूली में असफलता के कारण विकास कार्यों के लिए आवश्यक धनराशि का भी अभाव बना हुआ है।
नागरिकों का मानना है कि शहर की नीरस और अव्यवस्थित सूरत बदलने के लिए राजनीतिक इच्छाशक्ति जरूरी है। युवाओं, नए चेहरों और कुशल नेतृत्व को आगे लाने से ही शहर में सकारात्मक बदलाव संभव है। लोगों का कहना है कि पुराने चेहरों ने वर्षों तक शहर की समस्याओं की अनदेखी की है, इसलिए इस बार चुनाव में बदलाव आवश्यक है।
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कई नागरिकों ने यह भी कहा कि वे नई उम्मीदों के साथ नए नेतृत्व की प्रतीक्षा कर रहे थे, लेकिन दल बदलकर फिर से चुनाव लड़ने वाले नेताओं की राजनीति से वे निराश हैं। लोग यह बारीकी से देख रहे हैं कि कौन सी पार्टी वास्तव में नए, सक्षम और स्वच्छ छवि वाले चेहरों को मौका देती है और शहर के विकास को प्राथमिकता देती है।