
किसे मिलेगी नगराध्यक्ष पद की कुर्सी (सौजन्यः सोशल मीडिया)
Malkapur News: हाल ही में नगर पालिका चुनावों की घोषणा की गई है और नगराध्यक्ष का चुनाव 2 दिसंबर को होना है। हर बार की तरह इस बार भी चुनाव में धार्मिक राजनीति देखने की संभावना जताई जा रही है। मलकापुर शहर में हिंदू और मुस्लिम समुदायों के बीच राजनीति का प्रभाव अक्सर दिखाई देता है।
कांग्रेस पार्टी द्वारा नगराध्यक्ष पद की जिम्मेदारी देना उसकी जीत माना जा सकता है, लेकिन अगर कांग्रेस मुस्लिम समुदाय से उम्मीदवार उतारती है, तो धार्मिक राजनीति का प्रभाव और अधिक स्पष्ट रूप से दिखाई देने की संभावना है। माना जा रहा है कि शहर का बड़ा हिस्सा हिंदू मतदाता मुस्लिम उम्मीदवार को वोट नहीं देगा। ऐसे में संकेत मिल रहे हैं कि धार्मिक ध्रुवीकरण तेज होगा और इसका फायदा भाजपा उम्मीदवार को मिल सकता है।
फिलहाल कांग्रेस और भाजपा दोनों ने अपने उम्मीदवार घोषित नहीं किए हैं। मतदाताओं के बीच चर्चा है कि यदि कांग्रेस श्यामकुमार राठी, हरीश रावल, राजेंद्र वाडेकर, डॉ. कोलते या राजू पाटिल जैसे नामों में से किसी को उम्मीदवार बनाती है, तो कांग्रेस की जीत तय मानी जा रही है। लेकिन यदि कांग्रेस रशीद खान जामदार, अतीक जवारीवाले या किसी अन्य मुस्लिम समुदाय के उम्मीदवार को टिकट देती है, तो नगराध्यक्ष का पद भाजपा की ओर झुक सकता है, क्योंकि स्थानीय राजनीति में धर्म का प्रभाव अभी भी बना हुआ है।इसी वजह से चर्चा है कि कांग्रेस और भाजपा दोनों ही अपनी उम्मीदवारी धर्म आधारित राजनीतिक समीकरणों को ध्यान में रखते हुए तय करेंगे।
माना जाता है कि मलकापुर नगर पालिका में अब तक कांग्रेस का ही परचम रहा है, क्योंकि मुस्लिम बहुल मतदाता कांग्रेस से भावनात्मक रूप से जुड़े हुए हैं। यही कारण है कि कहा जा रहा है कि कांग्रेस के उम्मीदवार को शुरुआती आधार पर 12 से 15 हजार वोटों का मजबूत समर्थन मिलता है, जबकि भाजपा उम्मीदवार लगभग शून्य आधार से शुरुआत करता है।
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मुस्लिम समुदाय कांग्रेस को एकमुश्त वोट देता है, जबकि हिंदू एवं मुस्लिम दोनों समुदायों से कांग्रेस को समर्थन मिलता है। दूसरी ओर मुस्लिम मतदाता भाजपा को वोट देने में रुचि नहीं दिखाते। इसी कारण मतदाताओं के बीच चर्चा है कि धार्मिक और राजनीतिक समीकरणों का मेल इस बार नगराध्यक्ष की कुर्सी किसके हाथ आएगी, यह आने वाला समय ही बताएगा।






