चुनाव के बाद भी ठंडे बस्ते में जनता दरबार, पालकमंत्री भोयर की प्रतीक्षा में नागरिक
Pankaj Bhoyar: नगर परिषद चुनाव समाप्त होने के बाद भी भंडारा जिले में जनता दरबार शुरू न होने से नागरिक परेशान हैं और पालकमंत्री डॉ. पंकज भोयर के दौरे की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
- Written By: आंचल लोखंडे
चुनाव के बाद भी ठंडे बस्ते में जनता दरबार
Bhandara Janta Darbar: भंडारा जिले के पालकमंत्री डॉ. पंकज भोयर ने पदभार संभालने के बाद जनता दरबार के माध्यम से प्रशासनिक पारदर्शिता की एक सराहनीय पहल शुरू की थी। हर सोमवार को तहसील स्तर पर आयोजित होने वाला यह दरबार नागरिकों की समस्याओं के समाधान के लिए आशा की किरण बन गया था।
हालांकि नगर परिषद चुनाव के चलते लागू आचार संहिता के कारण नवंबर महीने से इस जनोपयोगी उपक्रम को अस्थायी रूप से स्थगित कर दिया गया था। अब 21 दिसंबर को चुनाव परिणाम घोषित हो चुके हैं और आचार संहिता की तकनीकी बाधा भी पूरी तरह समाप्त हो गई है। इसके बावजूद प्रशासन की ओर से जनता दरबार को पुनः शुरू करने को लेकर कोई स्पष्ट पहल नजर नहीं आ रही है, जिससे नागरिकों में असंतोष और चिंता व्याप्त है।
जनता दरबार
जनता दरबार की संकल्पना धरातल पर बेहद प्रभावी साबित हुई थी और बड़ी संख्या में आवेदनों के निपटारे में प्रशासन को सफलता मिली थी। लेकिन फिलहाल कई आवेदन फॉलो-अप के अभाव में लंबित पड़े हैं। एक ओर पालकमंत्री से सीधे संवाद का अभाव और दूसरी ओर प्रशासन की सुस्त कार्यप्रणाली के बीच आम जनता खुद को असहाय महसूस कर रही है।
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जिले के विकास के प्रति अनास्था?
भंडारा जिले को अब तक प्रायः बाहरी जिलों के पालकमंत्री ही मिलते रहे हैं। यह परंपरा टूटने और डॉ. पंकज भोयर के रूप में विदर्भ से नेतृत्व मिलने पर जनता की उम्मीदें काफी बढ़ गई थीं। हालांकि नगर परिषद चुनाव के नतीजे आने के बाद जिले की राजनीतिक और प्रशासनिक स्थिति का जायजा लेने के लिए पालकमंत्री अब तक एक बार भी जिले के दौरे पर नहीं आए हैं।
चुनाव परिणाम घोषित हुए आठ दिन बीत जाने के बावजूद पालकमंत्री की अनुपस्थिति को लेकर गांव-गांव में यह चर्चा शुरू हो गई है कि क्या जनता दरबार केवल एक राजनीतिक प्रयोग था या वास्तव में जनहित से जुड़ा स्थायी उपक्रम।
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सोमवार के संवाद की फिर से प्रतीक्षा
जिले की सातों तहसीलों में हर सोमवार सुबह 10 बजे शुरू होने वाला यह जनता दरबार नागरिकों के लिए समाधान का मजबूत मंच था। आचार संहिता के दौरान तहसील स्तर पर नियमित आवेदन स्वीकार किए गए, लेकिन नागरिकों का कहना है कि पालकमंत्री की मौजूदगी में जो प्रशासनिक गति और भरोसा मिलता था, वह सामान्य प्रक्रिया में संभव नहीं हो पा रहा है। लंबित आवेदनों के शीघ्र निपटारे और जनता के विश्वास की पुनर्बहाली के लिए पालकमंत्री द्वारा तत्काल जिले का दौरा कर जनता दरबार को पूर्ववत शुरू करने की मांग अब जोर पकड़ रही है।
