Ajit Pawar Plane Crash DGCA Report (फोटो क्रेडिट-X)
Ajit Pawar Death Investigation Updates: महाराष्ट्र के पूर्व उपमुख्यमंत्री अजित पवार की विमान दुर्घटना में हुई दुखद मृत्यु के बाद, इस मामले की जांच को लेकर एक बड़ा अपडेट सामने आया है। केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू ने स्पष्ट किया है कि डीजीसीए (DGCA) और एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (AAIB) की जांच युद्ध स्तर पर चल रही है। उन्होंने आश्वासन दिया है कि जांच की प्रारंभिक रिपोर्ट बहुत जल्द सार्वजनिक की जाएगी।
यह खुलासा तब हुआ है जब विपक्ष और परिवार के सदस्यों ने इस हादसे के पीछे किसी बड़ी साजिश की आशंका जताई है।
नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू ने बताया कि प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, लैंडिंग के समय विजिबिलिटी बहुत कम थी। उन्होंने एटीसी (ATC) और पायलट के बीच हुए अंतिम संवाद का हवाला देते हुए कुछ महत्वपूर्ण तथ्य साझा किए:
पहली कोशिश: पायलट को रनवे दिखाई नहीं दिया, जिसके बाद ‘गो-अराउंड’ (विमान को दोबारा ऊपर ले जाना) किया गया।
दूसरी कोशिश: दूसरी बार पायलट ने रनवे दिखने की पुष्टि की और लैंडिंग की अनुमति मांगी।
हादसा: अनुमति मिलने के महज एक मिनट के भीतर विमान बारामती एयरपोर्ट के रनवे से मात्र 200 मीटर पहले क्रैश हो गया।
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अजित पवार के भतीजे और विधायक रोहित पवार ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इस हादसे को ‘100% साजिश’ (Conspiracy) करार दिया है। उन्होंने जांच पर कई तीखे सवाल उठाए हैं:
ट्रांसपोंडर का बंद होना: रोहित पवार का दावा है कि क्रैश से ठीक एक मिनट पहले विमान का ट्रांसपोंडर किसने और क्यों बंद किया?
पायलट की चुप्पी: उन्होंने सवाल उठाया कि विमान के नीचे गिरते समय मुख्य पायलट की आवाज रिकॉर्डिंग में क्यों नहीं है? केवल सहायक पायलट ही क्यों बोल रहा था?
अवैध ईंधन टैंक: उन्होंने आशंका जताई कि क्या विमान में अवैध रूप से अतिरिक्त ईंधन टैंक रखे गए थे, जो एक ‘बम’ की तरह काम कर सकते हैं?
हादसे की गंभीरता को देखते हुए डीजीसीए ने VSR वेंचर्स (जिसका यह विमान था) सहित सभी नॉन-शेड्यूल्ड ऑपरेटरों का विशेष सुरक्षा ऑडिट शुरू कर दिया है।
ब्लैक बॉक्स की जांच: विमान का ब्लैक बॉक्स बरामद कर लिया गया है और उसकी डेटा डिकोडिंग चल रही है।
पारदर्शी जांच का वादा: मंत्री नायडू ने कहा कि सरकार इस मामले में पूरी तरह पारदर्शी है। उन्होंने यह भी बताया कि महाराष्ट्र सरकार के अनुरोध पर जांच को समयबद्ध (Time-bound) तरीके से पूरा किया जा रहा है ताकि किसी भी तरह के मानवीय या तकनीकी हस्तक्षेप की संभावना को स्पष्ट किया जा सके।