crop loss compensation (सोर्सः सोशल मीडिया)
Bhandara Human Wildlife Conflict: वन संपदा से समृद्ध भंडारा जिले में इन दिनों मानव-वन्यजीव संघर्ष चरम पर पहुंच गया है। जिले का बड़ा हिस्सा घने जंगलों से घिरा है और खेती की जमीन सीधे वन क्षेत्र से सटी होने के कारण वन्यजीवों के हमलों में लगातार वृद्धि हो रही है। वन विभाग के ताजा आंकड़ों के अनुसार, 1 अप्रैल 2025 से अब तक फसल नुकसान, पशुधन मृत्यु और मानव हानि के कुल 6,417 मामलों में शासन को 7 करोड़ 33 लाख 76 हजार 451 रुपये का मुआवजा देना पड़ा है।
भंडारा वन विभाग के अंतर्गत भंडारा, पवनी, अड्याल, साकोली, लाखनी, लाखांदुर, लेंडेंझरी, जांबकांद्री, नाकाडोंगरी और तुमसर जैसे प्रमुख वन परिक्षेत्र आते हैं। जिले में 12,587.217 हेक्टेयर वन क्षेत्र है। साथ ही कोका वन्यजीव अभयारण्य और उमरेड-पवनी-करहांडला वन्यजीव अभयारण्य के हिस्से होने के कारण यहां बाघ, तेंदुआ, जंगली सूअर और नीलगाय की संख्या में वृद्धि हुई है, जिससे संघर्ष की घटनाएं बढ़ी हैं।
वन क्षेत्रों से सटे गांवों के किसानों के लिए खेती जोखिम भरा काम बन गया है। अब तक 5,559 फसल नुकसान के मामले दर्ज किए गए हैं। इसके लिए शासन ने 5 करोड़ 35 लाख 11 हजार 140 रुपये का मुआवजा वितरित किया है। विशेष रूप से जंगली सूअरों के हमलों से किसानों की खड़ी फसल बर्बाद हो रही है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति पर गंभीर असर पड़ा है।
वन्यजीवों के हमलों में 814 पशुओं की मृत्यु हुई है, जिसके लिए 1 करोड़ 22 लाख 99 हजार 564 रुपये की भरपाई दी गई है। सबसे चिंताजनक स्थिति मानव हानि की है। पिछले सात-आठ महीनों में वन्यजीव हमलों में 2 लोगों की मौत हुई है, जिनके परिजनों को 50 लाख रुपये की सहायता दी गई। वहीं 42 लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं, जिनके उपचार के लिए 25 लाख 65 हजार 747 रुपये खर्च किए गए।
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लगातार हो रहे हमलों से जंगल से सटे गांवों में भय का वातावरण है। किसानों का कहना है कि अब दिन में भी खेतों में जाना जोखिम भरा हो गया है। ग्रामीणों ने मांग की है कि वन विभाग केवल मुआवजा देने तक सीमित न रहे, बल्कि सौर बाड़ (सोलर फेंसिंग), सुरक्षा उपाय और वन्यजीव नियंत्रण के ठोस कदम उठाए जाएं, ताकि मानव-वन्यजीव संघर्ष पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सके।