Bhandara: फाइलों में दफन हुआ मजदूरों का हक; सात महीने बाद भी जिला समिति नहीं निपटा सकी लंबित प्रस्ताव

Workers Protest: भंडारा जिले में निर्माण श्रमिकों के पंजीयन और नवीनीकरण की प्रक्रिया सुस्त पड़ गई है। हजारों मजदूर योजनाओं के लाभ से वंचित हैं, क्योंकि उनके आवेदन महीनों से 'पेंडिंग' पड़े हैं।
Farmer's Protest:
प्रतीकात्मक तस्वीर (सोर्स - सोशल मीडिया)
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Workers Protest In Bhandara: भंडारा, ब्यूरो। महाराष्ट्र इमारत एवं अन्य निर्माण श्रमिक कल्याणकारी मंडल की ओर से चलाई जाने वाली विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ पाने के लिए भंडारा जिले के हजारों मजदूर इन दिनों सरकारी दफ्तरों की चौखट पर अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं। विडंबना यह है कि प्रशासन के सुस्त और ढुलमुल रवैये के कारण जिले में हजारों निर्माण श्रमिकों के पंजीयन और नवीनीकरण के आवेदन धूल फांक रहे हैं।

कई मजदूरों ने सात से आठ महीने पहले ही ऑनलाइन माध्यम से अपने आवेदन जमा कर दिए थे, लेकिन महीनों बीत जाने के बाद भी उनके प्रस्ताव अब तक लंबित पड़े हैं, जिससे श्रमिक वर्ग में भारी आक्रोश और निराशा का माहौल बना हुआ है।

अन्यथा योजनाओं के लाभ से रहेंगे वंचित

विभागीय आंकड़ों पर नजर डालें तो स्थिति काफी चिंताजनक दिखाई देती है। जिले में पंजीकरण के लिए अब तक कुल 1,57,920 आवेदन प्राप्त हुए थे। गहन जांच और छाननी के बाद इनमें से 1,03,234 श्रमिकों का पंजीकरण सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है। हालांकि, समस्या पुराने पंजीकृत श्रमिकों के नवीनीकरण को लेकर है। अब तक केवल 42,212 श्रमिकों का नवीनीकरण प्रक्रिया पूरी हो सकी है, जबकि 12,474 आवेदन आज भी तकनीकी और प्रशासनिक कारणों से अधर में लटके हुए हैं। नवीनीकरण न होने की वजह से ये श्रमिक मंडल की ओर से दी जाने वाली महत्वपूर्ण शैक्षणिक छात्रवृत्ति, स्वास्थ्य सहायता सहित अन्य योजनाओं से वंचित रह गए हैं।

प्रस्तावों का शीघ्र होगा निपटारा

महाराष्ट्र इमारत एवं अन्य निर्माण श्रमिक कल्याणकारी मंडल भंडारा के सहायक आयुक्त अशोक बहिर ने कहा कि अब तक 22 हजार से अधिक श्रमिकों को 22 करोड़ रुपये से ज्यादा का लाभ दिया जा चुका है। साथ ही लाखों श्रमिकों को सुरक्षा और घरेलू किट भी प्रदान की गई है। लंबित प्रस्तावों के निपटारे के लिए समिति की बैठक अगले सप्ताह प्रस्तावित है, जिसमें महत्वपूर्ण निर्णय लिए जाएंगे।

फाइलों का बोझ कम होने के बजाय बढ़ता जा रहा

उल्लेखनीय है कि इन लंबित मामलों के त्वरित समाधान के लिए सात महीने पहले एक विशेष जिला स्तरीय समिति का गठन किया गया था। इस समिति का मुख्य उद्देश्य प्रलंबित प्रस्तावों की बारीकी से जांच करना और उन्हें जल्द से जल्द मंजूरी प्रदान करना था। लेकिन हकीकत इसके उलट है। समिति के गठन के बाद भी फाइलों का बोझ कम होने के बजाय बढ़ता ही जा रहा है। कई मजदूर साल भर से अपने प्रोफाइल का स्टेटस चेक कर रहे है, जहां आज भी पेंडिंग शब्द ही उभर कर आता है। ऐसे में मजदूरों के मन में यह सवाल उठ रहा है कि आखिर यह समिति जमीनी स्तर पर काम कर रही है या यह महज कागजों तक ही सीमित है।

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