Bombay High Court ने नौसेना को लगाई फटकार, कहा- निर्माण पूरा होने के बाद NOC मांगना गलत

Bombay High Court Verdict: बॉम्बे हाईकोर्ट ने वरली पुनर्विकास परियोजना मामले में नौसेना की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। अदालत ने कहा कि निर्माण लगभग पूरा होने के बाद एनओसी मांगना उचित नहीं है।
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बॉम्बे हाई कोर्ट (फोटो सोर्स - गूगल इमेज)
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Bombay High Court Navy NOC: बॉम्बे हाईकोर्ट ने नौसेना को फटकार लगाते हुए कहा है कि किसी इमारत का काम लगभग पूरा होने के बाद एनओसी (अनापत्ति प्रमाणपत्र) मांगना गलत है।

अदालत ने साफ कहा कि अगर सुरक्षा को लेकर कोई चिंता थी, तो शुरुआत में ही कार्रवाई करनी चाहिए थी। यह मामला वरली स्थित आईएनएस त्राता के पास बन रही दो इमारतों से जुड़ा है।

इन इमारतों का निर्माण पुनर्विकास परियोजना के तहत किया जा रहा है। एक इमारत पूरी बन चुकी है, जबकि दूसरी का काम अंतिम चरण में है। यहां 72 परिवारों को नए घर मिलने हैं।

ऑक्युपेंसी सर्टिफिकेट (ओसी) देने पर भी रोक

नौसेना की आपत्ति के बाद म्हाडा ने निर्माण रोकने का नोटिस जारी किया था और ऑक्युपेंसी सर्टिफिकेट (ओसी) देने पर भी रोक लगा दी थी। इसके खिलाफ डेवलपर कंपनी टेक्नो फ्रेशवर्ल्ड एलएलपी ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि इतने सालों तक निर्माण काम चलने देने के बाद आखिर में एनओसी की मांग करना मनमाना फैसला है।

सभी सरकारी एजेंसियां नियमों के तहत करें काम

कोर्ट ने यह भी कहा कि संबंधित इमारतों को पहले ही जरूरी मंजूरियां मिल चुकी थीं। न्यायमूर्ति गिरीश कुलकर्णी और न्यायमूर्ति आरती साठे की पीठ ने अपने फैसले में कहा कि रक्षा विभाग सहित सभी सरकारी एजेंसियों को नियमों के अनुसार और निष्पक्ष तरीके से काम करना चाहिए, हाईकोर्ट के इस फैसले को मुंबई की पुनर्विकास परियोजनाओं के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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