

Gondia Monsoon Road Safety: गोंदिया जिले की सड़कों पर नदियों व नहरों पर बने जर्जर व अनियमित पुलों की समस्या कोई नई बात नहीं है। हर साल मानसून के मौसम में बाढ़ के पानी में कई लोगों की मृत्यु हो जाती है और तभी यह समस्या सामने आती है। लेकिन बारिश का मौसम समाप्त होते ही सरकार के साथ प्रशासन भी फाइल बंद कर देता है। बीते वर्ष की तरह इस वर्ष भी बारिश के मौसम में जोरदार बारिश हुई तो ये जर्जर पुल जानलेवा साबित हो जाएंगे। लेकिन बारिश के पूर्व पुलों की मरम्मत के लिए कोई पहल होती नहीं दिख रही रही है।
जिले में कई मार्गों पर विकास कार्य किए जा रहे हैं। लेकिन हकीकत में जिले के ग्रामीण इलाकों की सड़कें और उन पर बने बिना रेलिंग के पुल नागरिकों की जान ले रहे हैं। तिरोड़ा, सालेकसा, देवरी, सड़क अर्जुनी आदि सभी तहसीलों में जिला मुख्यालय को जोड़ने वाली सड़कें मृत्यु को आमंत्रण दे रही हैं।
उनमें से एक गोरेगांव-म्हसगांव, जिला मार्ग पर पांगोली नदी पर बना जर्जर पुल है। गोरेगांव तहसील मुख्यालय से डेढ़ किमी। दूर घोटी, म्हसगांव, कालीमाटी मार्ग पर पांगोली नदी पर 40 साल पहले एक छोटा पुल बनाया गया था। यह पुल पूरी तरह से जर्जर हो चुका है। जबकि इस पुल की ऊंचाई पुराने निर्माण के अनुसार कम है। पुल पर लगी रेलिंग गायब हो गई है। लेकिन इस पुल पर संबंधित विभाग द्वारा कोई दिशा-निर्देश बोर्ड नहीं लगाया गया है।
इसी तरह आदिवासी और नक्सली बहुल सालेकसा तहसील में घोंसी-नानवा मार्ग पर कुआंढ़ास नाले पर बने पुल को 30 से 35 साल पूरे हो चुके हैं और यह पुल भी अपने अंतिम पड़ाव पर है। ऐसे में वाहन चालकों के साथ-साथ पैदल चलने वाले लोगों को भी जान हथेली में लेकर सफर करना पड़ता है। खासकर जिले में सैकड़ों जर्जर पुल हैं और संबंधित विभाग की अनदेखी और जनप्रतिनिधियों की उदासीनता के कारण ये पुल अब हादसों का इंतजार कर रहे हैं।
गोरेगांव से डाकराम सुकड़ी मार्ग जो महत्वपूर्ण माना जाता है और गोरेगांव-तिरोड़ा तहसील को जोड़ता है वह खतरनाक है। क्योंकि यह मार्ग नागझिरा अभ्यारण्य से होकर गुजरता है। इस मार्ग पर कई छोटे पुल हैं। आधे से अधिक पुलों पर रेलिंग ही नहीं लगाई गई है। इस मार्ग पर हर दिन एसटी बसें, ऑटोरिक्शा, काली-पीली और अन्य वाहनों का आवागमन रहता है।