

Pune Municipal Corporation Property Tax: पुणे महानगरपालिका की स्थायी समिति ने शहर के विकास और नागरिक हितों से जुड़े कई महत्वपूर्ण फैसलों को मंजूरी दी है।
इनमें 1000 वर्ग फुट तक के अवैध आवासों पर एक समान टैक्स, देवाची उरुली में गार्डन वेस्ट प्रोजेक्ट और डेक्कन स्थित छत्रपति संभाजी महाराज स्मारक के सौंदर्याकरण का काम शामिल हैं।
इन निर्णयों से जहां एक ओर हजारों छोटे घर मालिकों को राहत मिलेगी, वहीं शहर के पर्यावरण और सांस्कृतिक विरासत को भी मजबूती मिलेगी। यह जानकारी स्थायी समिति के अध्यक्ष श्रीनाथ भिमाले ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में दी है।
स्थायी समिति ने निर्णय लिया है कि पुणे महानगरपालिका क्षेत्र में 1000 वर्ग फुट तक क्षेत्रफल वाले अवैध आवासों पर अब तीन गुना टैक्स के बजाय केवल सामान्य दर का प्रॉपर्टी टैक्स लगाया जाएगा। इस फैसले से छोटे घर मालिकों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है, क्योंकि अब तक कई। मामलों में ऐसे मकानों पर तीन गुना टैक्स लगाए जाने की शिकायतें सामने आ रही थीं।
महानगरपालिका प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यह निर्णय 30 मई 2019 के सरकार के निर्णय और महाराष्ट्र महानगरपालिका अधिनियम की धारा 267 (अ) के तहत लिया गया है। इसके अलावा 9 फरवरी 2026 के कार्यालयीन आदेश के अनुसार इस नीति को लागू किया जा रहा है।
स्थायी समिति अध्यक्ष श्रीनाथ भिमाले ने बताया कि इस निर्णय से शहर के हजारों छोटे आवास धारकों को सीधा लाभ मिलेगा और कर व्यवस्था अधिक पारदर्शी बनेगी। नगरसेविका रूपाली धावडे और नगरसेवक विशाल प्रशासन ने यह स्पष्टीकरण दिया कि छोटे आवासों को अब अनावश्यक रूप से अधिक टैक्स के दायरे में नहीं लाया जाएगा।
डेक्कन क्षेत्र में स्थित धर्मवीर छत्रपती संभाजी महाराज स्मारक के सौंदर्याकरण और विकास कार्यों के लिए 3.24 करोड़ रुपये की परियोजना को भी मंजूरी दी गई है। इस कार्य के तहत दगडी मेघडंबरी का निर्माण, भूमिगत मार्ग का सौंदर्याकरण और पूरे परिसर का विकास किया जाएगा।
इस परियोजना का कार्य मे महिम्ना कंस्ट्रक्शन प्रा लि को सौंपा गया है। कंपनी ने 2.74 करोड़ रुपये का टेंडर भरा गया था, जो अनुमानित लागत से 3।9 प्रतिशत अधिक है। अन्य टैक्स और शुल्क जोड़ने के बाद कुल परियोजना लागत 3.24 करोड़ रुपये तक पहुंच जाएगी।
महानगरपालिका की आरोग्यवर्धिनी योजना के तहत सरकार की ओर से डॉक्टरों की नियुक्ति की जाती हैं। इन डॉक्टरों को राज्य सरकार द्वारा 60 हजार रुपये मासिक वेतन दिया जाता है। इस व्यवस्था को और प्रभावी बनाने तथा सेवा विस्तार को बढ़ाने के संबंध में महानगरपालिका स्तर पर चर्चा की गई है।