Bhandara News: भंडारा में पशु चिकित्सा व्यवस्था बेहाल, 194 स्वीकृत पदों में केवल 68 पर नियुक्ति
Bhandara Veterinary Services: भंडारा के पशुसंवर्धन विभाग में 194 स्वीकृत पदों में से 126 पद रिक्त हैं। पशुधन विकास अधिकारी और पशु चिकित्सकों की कमी से पशु चिकित्सा सेवाएं प्रभावित हो रहा है।
- Written By: आंचल लोखंडे
भंडारा पशुसंवर्धन विभाग- फाइल फोटो (सोर्सः सोशल मीडिया)
Bhandara Animal Husbandry Department: कृषि के साथ-साथ पशुपालन और दुग्ध उत्पादन में अग्रणी भंडारा जिले में पशुधन की देखभाल करने वाले पशुसंवर्धन विभाग को भारी स्टाफ की कमी का सामना करना पड़ रहा है । राज्य सरकार द्वारा उपायुक्त पशुसंवर्धन विभाग और जिला परिषद पशुसंवर्धन विभाग का विलय किए जाने के बावजूद रिक्त पदों की समस्या दूर नहीं हो सकी है ।
पशु चिकित्सा सेवाओं के सामने बड़ी चुनौती
विभाग में प्रथम श्रेणी पशु चिकित्सा अधिकारी, पशुधन विकास अधिकारी समेत विभिन्न संवर्गों के 71 अधिकारी पद खाली हैं । इन पदों के रिक्त रहने से एक ही अधिकारी को कई क्षेत्रों और अतिरिक्त गांवों की जिम्मेदारी संभालनी पड़ रही है ।
194 स्वीकृत पदों में केवल 68 पर नियुक्ति
जिले में पशुधन की बड़ी संख्या को देखते हुए कर्मचारियों की कमी गंभीर चिंता का विषय बन गई है । विभाग में 194 स्वीकृत पदों के मुकाबले केवल 68 पदों पर नियुक्तियां हैं, जबकि 126 पद रिक्त पड़े हैं । इससे विभाग के नियमित कामकाज और विभिन्न सरकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन में बाधाएं उत्पन्न हो रही हैं । इसका सीधा असर पशुपालकों और किसानों को मिलने वाली पशु चिकित्सा सेवाओं पर पड़ रहा है ।
सम्बंधित ख़बरें
नागपुर में बढ़ा गैंगवार का खतरा: इंदौर की लाला कंपनी फैला रही नेटवर्क, सोशल मीडिया पर युवा को भटकाने की साजिश
वर्धा महाआरोग्य शिविर में 6,608 लोगों की निःशुल्क स्वास्थ्य जांच, हजारों मरीजों को मिला लाभ
जैसी करनी वैसी भरनी, समुद्र ने मुंबई को दिया 2500 मीट्रिक टन कचरे का गिफ्ट, कूड़ों से पटी चौपाटी
वर्धा में बाढ़ का खतरा: 213 गांव रेड जोन में, 27 अति संवेदनशील गांवों पर प्रशासन की विशेष नजर
प्रथम श्रेणी अधिकारियों के 59 पद खाली
प्रत्यक्ष रूप से पशुओं का उपचार करने और अधीनस्थ कार्यों की निगरानी करने वाले प्रथम श्रेणी अधिकारियों के 59 पद रिक्त हैं । सहायक पशुसंवर्धन आयुक्त (ग्रुप-ए) के 17 स्वीकृत पदों में से 10 पद भरे हैं, जबकि 7 पद खाली हैं । इनकी जिम्मेदारी फिलहाल प्रभारी अधिकारियों को सौंपी गई है । इसी प्रकार पशुधन विकास अधिकारी (ग्रुप-ए) के 81 स्वीकृत पदों में से 52 पद रिक्त हैं और केवल 29 अधिकारी कार्यरत हैं । यही अधिकारी गांवों में जाकर पशुओं की जांच, उपचार और शल्य चिकित्सा का कार्य करते हैं । पद रिक्त होने से पशु चिकित्सा सेवाएं गंभीर रूप से प्रभावित हो रही हैं ।
ये भी पढ़े: भंडारा में 47 हजार से अधिक उपभोक्ताओं पर ₹29.78 करोड़ बिजली बिल बकाया, 30 हजार कनेक्शन कटे
जिला परिषद स्तर पर भी 22 पद रिक्त
राज्य सरकार द्वारा विभागों के एकीकरण के बाद जिला पशुसंवर्धन अधिकारी का पद समाप्त कर उसकी जिम्मेदारी उपायुक्त पशुसंवर्धन को सौंपी गई है । अब दुग्ध पशु वितरण, कुक्कुट पालन, बकरी वितरण, केंद्र प्रायोजित योजनाएं, राष्ट्रीय पशुधन मिशन, राष्ट्रीय गोकुल मिशन, स्मार्ट योजना, राष्ट्रीय कृषि विकास योजना, पशुगणना, चारा उत्पादन, महाराष्ट्र प्राणी कल्याण मंडल तथा श्वान प्रजनन एवं विपणन केंद्र से संबंधित कार्य भी उनके अधीन हैं । इसके बावजूद जिला परिषद के अंतर्गत पशुधन विकास अधिकारी के 3, सहायक पशुधन विकास अधिकारी के 4 तथा पशुधन पर्यवेक्षक के 15, यानी कुल 22 पद अभी भी रिक्त हैं ।
परिचर और अन्य कर्मचारियों की भी भारी कमी
पशु चिकित्सकों की सहायता करने वाले परिचर (ग्रुप-डी) के बड़ी संख्या में पद खाली हैं । परिचरों की कमी के कारण कई स्थानों पर पशु चिकित्सकों को स्वयं उनका कार्य करना पड़ रहा है । इसके अलावा पशुधन पर्यवेक्षक के 16 पदों में से 8 पद खाली हैं । वहीं वरिष्ठ सहायक के 4 में से 2, वरिष्ठ लिपिक के 4 में से 2, कनिष्ठ लिपिक के 3 में से 2 तथा वाहन चालक के 3 में से 2 पद रिक्त हैं । नाईक वर्ग का एकमात्र स्वीकृत पद भी लंबे समय से खाली है ।
