Wardha Flood Alert: मानसून के दौरान नदियों में आने वाली बाढ़ से नदी किनारे बसे गांवों को हर वर्ष भारी नुकसान उठाना पड़ता है । बाढ़ के कारण जान-माल की क्षति के साथ-साथ किसानों की फसलें भी प्रभावित होती हैं । पिछले कुछ दिनों से जिले के मौसम में लगातार बदलाव देखने को मिल रहा है । मौसम विभाग ने आगामी दिनों में जिले में भारी बारिश की संभावना जताई है । इसे देखते हुए जिला प्रशासन ने संभावित आपदा से निपटने के लिए तैयारियां तेज कर दी हैं ।
जिले में नदी तट पर बसे 213 गांव रेड जोन में शामिल हैं, जबकि 27 गांव अति संवेदनशील श्रेणी में हैं, जहां बाढ़ का खतरा सबसे अधिक रहता है । इन गांवों में कई ऐसे हैं, जिनके पुनर्वास का मुद्दा वर्षों से लंबित है । स्थानीय नागरिकों द्वारा समय-समय पर पुनर्वास की मांग उठाई जाती रही है, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकल पाया है । फिलहाल जिले में अत्यधिक वर्षा नहीं हुई है, लेकिन मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार आने वाले दिनों में कभी भी भारी बारिश हो सकती है । हाल ही में लगातार तीन दिनों तक रुक-रुककर बारिश हुई, जिससे कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ ।
हालांकि, यदि भारी वर्षा होती है तो नदियों और नालों में बाढ़ आने से गांवों और खेतों में पानी घुसने की आशंका बनी हुई है । इस स्थिति से निपटने के लिए जिला आपदा प्रबंधन विभाग ने सभी तहसीलों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए हैं । वर्धा जिले से वर्धा, वणा, धाम, पोथरा, बोर, यशोदा, बाकली, भदाड़ी, चोड़, कड़, शेर और नांद सहित 12 प्रमुख नदियां बहती हैं । इसके अलावा जिले में कई बड़े नाले भी हैं । इन नदियों और नालों में बाढ़ आने पर सबसे अधिक खतरा नदी किनारे बसे 27 अति संवेदनशील गांवों को रहता है ।
इनमें सेलू तहसील का क्षीरसमुद्रपुर, देवली तहसील के डिगडोह और दिघी (बो ।), आर्वी तहसील के जलगांव, शिरपुर, नांदपुर, कर्माबाद और वर्धमणेरी, हिंगनघाट तहसील का कान्होली तथा हिंगनघाट शहर का वणा नदी तटीय क्षेत्र और समुद्रपुर तहसील के कुर्ला, डोंगरगांव, गोविंदपुर, उमरा, पारडी, नंदपुर, शेडगांव, उब्दा, औरंगपुर, सेवा, सुजातपुर, रामनगर, नांद्रा, बाबापुर, कोरा, मंगरुल तथा आसोला जैसे गांव शामिल हैं । इन क्षेत्रों में विशेष सतर्कता बरतने और आवश्यक सुरक्षा उपाय सुनिश्चित करने की जरूरत है ।
संभावित बाढ़ की स्थिति से निपटने - के लिए बाढ़ - प्रभावित गांवों में जनजागरूकता कार्यशालाएं आयोजित की गई हैं । सोशल मीडिया समूहों को सक्रिय रखा गया है तथा स्थानीय स्तर पर आपदा प्रतिक्रिया समितियों का गठन किया गया है । बचाव एवं राहत दल, प्राथमिक उपचार दल तथा खोज एवं बचाव टीमों को तैयार रखा गया है । इसके अलावा आपदा राहत केंद्रों में आवश्यक दवाइयों का भंडार, लाइफ जैकेट, नाव, सूखा राशन, स्वच्छ पेयजल तथा अन्य जरूरी सामग्री उपलब्ध कराई गई है ।
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वर्धा के आपदा नियंत्रण अधिकारी शुभम घोरपड़े ने कहा कि बारिश के मौसम में नदी तट पर बसे गांवों में बाढ़ की स्थिति उत्पन्न होने की संभावना रहती है । इस वर्ष जिला प्रशासन ने समय रहते आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली हैं । संभावित आपदा से निपटने के लिए जिला आपदा प्रबंधन की पूरी व्यवस्था सतर्क और तैयार है । सभी तहसीलों में आवश्यक संसाधन उपलब्ध करा दिए गए हैं ।