गड़चिरोली: देलनवाड़ी और पल्सगांव के पशु अस्पताल रामभरोसे, रिक्त पदों को लेकर नागरिकों ने दी आंदोलन की चेतावनी

Animal Welfare News: गड़चिरोली के पल्सगांव और देलनवाड़ी पशु अस्पतालों में लंबे समय से डॉक्टरों व कर्मचारियों के पद खाली हैं। मानसून में बढ़ते संक्रमण के बीच ग्रामीणों ने आंदोलन की चेतावनी दी है।
Gadchiroli Veterinary Hospital Staff Shortage
पशु अस्पतालों रिक्त पद प्रतीकात्मक तस्वीर (सोर्स - सोशल मीडिया)
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Gadchiroli Veterinary Hospital Staff Shortage: गड़चिरोली  जिले के आरमोरी तहसील के पल्सगांव तथा देलनवाड़ी स्थित श्रेणी-1 पशु अस्पताल में पशु चिकित्सा अधिकारियों के पद लंबे समय से रिक्त होने के कारण क्षेत्र के पशुपालकों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। दोनों अस्पताल फिलहाल सीमित कर्मचारियों के भरोसे संचालित हो रहे हैं।

जिला कांग्रेस के उपाध्यक्ष दिलीप घोडाम के नेतृत्व में नागरिकों ने पशुसंवर्धन विभाग के उप आयुक्त, गड़चिरोली को ज्ञापन सौंपकर रिक्त पदों को तत्काल भरने की मांग की है। ज्ञापन में बताया गया है कि पल्सगांव तथा देलनवाड़ी क्षेत्र के पशुपालकों को समय पर उपचार व आवश्यक पशु स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से सरकार ने दोनों स्थानों पर श्रेणी-1 पशु चिकित्सालय स्थापित किए हैं। लेकिन पिछले काफी समय से इन अस्पतालों में पशु चिकित्सा अधिकारियों के पद खाली होने से सेवाएं गंभीर रूप से प्रभावित हो रही हैं।

लंबे समय से खाली हैं पद

पल्सगांव के पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. सुपारे का तबादला पोर्ला कर दिया गया, लेकिन उनकी जगह अब तक नए अधिकारी की नियुक्ति नहीं की गई। वहीं, देलनवाड़ी के पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. ढोगे पिछले लगभग 1 वर्ष से अवकाश पर हैं और उनके स्थान पर भी किसी वैकल्पिक अधिकारी की नियुक्ति नहीं की गई है।

देलनवाड़ी पशु चिकित्सालय में परिचर और पशुधन पर्यवेक्षक सहित अन्य पद भी रिक्त हैं। कर्मचारियों की कमी के कारण पल्सगांव के पशुधन पर्यवेक्षक जी. एम. चलेवार को प्रतिनियुक्ति पर देलनवाड़ी भेजा गया है, जिससे पल्सगांव की सेवाओं पर भी अतिरिक्त दबाव बढ़ गया है।

बरसात में बढ़ती हैं संक्रमित बीमारियां

ज्ञापन में कहा गया है कि पल्सगांव पशु चिकित्सालय के अंतर्गत पल्सगांव, पाथरगोटा, जोगीसाखरा, रामपुर, शंकरनगर तथा सालमारा सहित कई गांव आते हैं, जहां लगभग 5 हजार पशुधन हैं। देलनवाड़ी क्षेत्र में भी बड़ी संख्या में पशुधन होने के बावजूद स्थायी पशु चिकित्सा अधिकारी उपलब्ध नहीं है। इससे पशुपालकों को इलाज के लिए दूसरे स्थानों का सहारा लेना पड़ रहा है।

बरसात के मौसम में पशुओं में संक्रामक तथा मौसमी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे समय में चिकित्सकों की अनुपस्थिति से पशुधन के स्वास्थ्य तथा किसानों की आजीविका पर गंभीर असर पड़ सकता है। इसलिए सरकार तथा पशुसंवर्धन विभाग को इस मुद्दे पर तत्काल कार्रवाई करनी चाहिए।

आंदोलन की चेतावनी

कांग्रेस के गड़चिरोली जिला उपाध्यक्ष दिलीप घोडाम ने कहा कि हजारों पशुओं की स्वास्थ्य व्यवस्था कुछ कर्मचारियों के भरोसे नहीं छोड़ी जा सकती। दोनों अस्पतालों में स्थायी पशु चिकित्सा अधिकारियों सहित सभी रिक्त पदों को शीघ्र भरा जाए, ताकि पशुपालकों को नियमित और गुणवत्तापूर्ण सेवाएं मिल सकें।

यदि जल्द ही नियुक्तियां नहीं की गईं तो क्षेत्र के पशुपालकों तथा नागरिकों के साथ मिलकर व्यापक आंदोलन किया जाएगा। इस दौरान कार्तिक मातरे, रोहित रायशिडाम, अविनाश दुधारे, प्रणय दुधारे, यशवंत नखाते, गोविंदा बगामरे, खुशाल चौके, केशव उरकुड़े, माणिक शेरकुरे सहित बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित थे।

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