संतोष देशमुख हत्याकांड: बॉम्बे हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, वाल्मीक कराड़ को राहत नहीं

Aurangabad Bench Murder Case: संतोष देशमुख हत्याकांड में वाल्मीक कराड़ की दोषमुक्ति याचिका पर बॉम्बे हाईकोर्ट की औरंगाबाद पीठ ने हस्तक्षेप से इनकार कर दिया।
Santosh Deshmukh murder case: Bombay High Court delivers major verdict, no relief for Valmik Karad
प्रतीकात्मक तस्वीर ( सोर्स : सोशल मीडिया )
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Bombay High Court Criminal Case: छत्रपति संभाजीनगर बीड़ जिले की केज तहसील के मस्साजोग के सरपंच संतोष देशमुख हत्याकांड मामले में वाल्मीक कराड़ की ओर से दायर दोषमुक्ति की अपील में हस्तक्षेप करने से बॉम्बे उच्च न्यायालय की औरंगाबाद खंडपीठ के न्यायमूर्ति संदीपकुमार मोरे और न्यायमूर्ति आबासाहेब शिंदे ने साफ इनकार कर दिया है।

इससे पहले सत्र न्यायालय ने कराड़ का दोषमुक्ति आवेदन खारिज करने के बाद उसने उत्त्व न्यायालय में अपील दायर की थी। इस पर राज्य सरकार की ओर से हलफनामा दाखिल किया गया था। अंबाजोगाई स्थित विशेष न्यायालय में संतोष देशमुख हत्याकांड में आरोप तया (चार्ज फ्रेम) किए जाने से कराड़ ने अपनी अपील में संशोधन की अनुमति मांगते हुए आवेदन पेश किया।

आरोप तय होने के मुद्दे में संशोधन स्वीकार्य नहीं

राज्य सरकार की ओर से इस संशोधन आवेदन का विरोध करते हुए हलफनामा दाखिल किया गया। इसमें सुप्रीम कोर्ट और उच्च न्यायालय के फैसलों का हवाला देते हुए बताया गया कि एक बार आरोप तय हो जाने के बाद दोषमुक्ति का आवेदन निष्प्रभावी हो जाता है।

आरोप तय होने के कारण कराड़ का दोषमुक्ति आवेदन और उससे जुड़ी अपील दोनों ही निष्फल हो चुके हैं, इसलिए उन्हें खारिज किया जाना चाहिए। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया कि आरोप तय होने के मुद्दे में किसी प्रकार का संशोधन स्वीकार्य नहीं है।

सरकारी वकील अमरजीतसिंह गिरासे ने की पैरवी

खंडपीठ ने सुप्रीम कोर्ट व उच्च न्यायालय के पूर्व निर्णयों का संदर्भदेते हुए यह स्पष्ट किया कि अपील निष्प्रभावी हो चुकी है, इसलिए इसमें हस्तक्षेप नहीं किया जा सकता। राज्य सरकार की ओर से मुख्य सरकारी वकील अमरजीतसिंह गिरासे ने पैरवी की।

उन्हें अधिवक्ता सचिन सलगरे और पवन लखोटिया ने सहयोग दिया। कराड़ की ओर से एड। निलेश घाणेकर ने पक्ष रखा व उन्हें अधिवक्ता संदेश कुलकर्णी ने सहयोग किया।