Sambhajinagar Hydraulic Testing Pipeline( Source: Social Media )
Sambhajinagar Hydraulic Testing Pipeline: छत्रपति संभाजीनगर शहर की महत्वाकांक्षी नई जलापूर्ति योजना के तहत बिछाई गई मुख्य जलवाहिनी की हाइड्रोलिक जांच अनिवार्य रूप से करानी ही होगी। यह जानकारी विभागीय आयुक्त तथा शहर जलापूर्ति योजना के लिए न्यायालय द्वारा नियुक्त समिति के प्रमुख जितेंद्र पापलकर ने मंगलवार को दी।
उन्होंने स्पष्ट किया कि योजना की निविदा में हाइड्रोलिक परीक्षण का स्पष्ट प्रावधान है। इसलिए इस जांच को टालने या इसमें किसी प्रकार की बाधा डालने का कोई प्रश्न ही नहीं उठता।
मंगलवार को पत्रकारों से बातचीत करते हुए पापलकर ने कहा कि शहर में नई जलापूर्ति योजना के अंतर्गत 2500 मिमी व्यास की मुख्य जलवाहिनी के माध्यम से पानी लाया जा रहा है।
इस परियोजना के तहत कुल 38 किलोमीटर लंबी पाइप लाइन बिछाई गई है। हालांकि अब तक केवल 5 किलोमीटर पाइपलाइन की ही हाइड्रोलिक जांच की गई है।
बाकी 33 किलोमीटर हिस्से की जांच क्यों नहीं की गई, इस पर सवाल उठने लगे हैं। सोमवार को आयोजित समीक्षा बैठक में महानगरपालिका आयुक्त अमोल येडगे ने भी इस विषय को गंभीरता से उठाया था।
उन्होंने अधिकारियों से पूछा कि जब पाइपलाइन का इतना बड़ा हिस्सा अभी तक परीक्षण से नहीं गुजरा है, तो उसकी गुणवत्ता और मजबूती की पुष्टि कैसे की जाएगी।
इसी पृष्ठभूमि में विभागीय आयुक्त पापलकर ने स्पष्ट किया कि पूरी जलवाहिनी को हाइड्रोलिक जांच करना अनिवार्य है और यह प्रक्रिया पूरी कराई जाएगी। उन्होंने बताया कि इस संबंध में जीवन प्राधिकरण भी सकारात्मक है।
जलवाहिनी की जांच के लिए संबंधित विभाग के मुख्य अभियंता से चर्चा की जा चुकी है और आगे की प्रक्रिया तय की जा रही है। पापलकर ने कहा कि जलापूर्ति जैसी महत्वपूर्ण परियोजना में किसी भी प्रकार की तकनीकी त्रुटि या लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।
हाइड्रोलिक जांच पाइपलाइन की मजबूती, गुणवता और सुरक्षा सुनिश्चित करने की महत्वपूर्ण तकनीकी प्रक्रिया है। इस परीक्षण के दौरान पाइपलाइन में पानी भरकर सामान्य दबाव से अधिक दबाव उत्पन्न किया जाता है।
इसके बाद निश्चित समय तक यह देखा जाता है कि पाइपलाइन में दबाव स्थिर रहता है या उसमें कमी आती है। यदि दबाव कम होता है तो इसका मतलब पाइपलाइन मैं कहीं न कहीं रिसाव या तकनीकी खामी मौजूद है। इस परीक्षण के माध्यम से पाइपलाइन की गुणवत्ता, मजबूती और दीर्घकालीन उपयोगिता की भी जांच की जाती है।
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विशेषज्ञों के अनुसार हाइड्रोलिक जांच पूरी होने के बाद ही यह सुनिश्चित किया जा सकता है कि पाइपलाइन सुरक्षित है और भविष्य में शहर की जलापूर्ति व्यवस्था बिना किसी बाधा के सुचारू रूप से चल सकेगी।