प्रतीकात्मक तस्वीर ( सोर्स: सोशल मीडिया )
Chhatrapati Sambhajinagar Jackwell Inspection: छत्रपति संभाजीनगर पैठण से छत्रपति संभाजीनगर तक पाइप लाइन बिछाकर लाई जा रही महत्वाकांक्षी पानी आपूर्ति योजना के जैकवेल कार्य का गुरुवार को निरीक्षण किया जाएगा।
यह निरीक्षण विभागीय आयुक्त की अध्यक्षता वाली समिति, महाराष्ट्र जीवन प्राधिकरण तथा मनपा के अधिकारियों द्वारा किया जाएगा। निरीक्षण के उपरांत तैयार की गई रिपोर्ट शुक्रवार को होने वाली सुनवाई के दौरान प्रस्तुत करने के निर्देश मुंबई उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति रवींद्र घुगे तथा न्यायमूर्ति अभय मंत्री ने दिए हैं। बुधवार को हुई सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता आर।
एम। धोर्डे ने ठेकेदार कंपनी जीवीपीआर की ओर से पक्ष रखते हुए कहा कि पानी छोड़ने में कोई आपत्ति नहीं है। इस पर मनपा के एड। संभाजी टोपे ने न्यायालय को बताया कि अब तक जलकुंभों का औपचारिक हस्तांतरण नहीं हुआ है।
इस पर एड। धोर्डे ने स्पष्ट किया कि छह जलकुंभ तैयार हैं और 15 मार्च तक 26 से 30 जलकुंभ हस्तांतरित कर दिए जाएंगे। सुनवाई के दौरान पानी छोड़ने के संदर्भ में जैकवेल के कार्य तथा उसकी स्वच्छता का मुद्दा भी उठाया गया।
इस पर न्यायालय ने निर्देश दिया कि विभागीय आयुक्त की समिति, महाराष्ट्र जीवन प्राधिकरण और मनपा के अधिकारी संयुक्त रूप से स्थल निरीक्षण कर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करें।
इस दौरान ठेकेदार कंपनी के लगभग 150 करोड़ रुपये के बकाया भुगतान का मुद्दा भी न्यायालय में उठाया गया, पिछली सुनवाई में महाराष्ट्र जीवन प्राधिकरण को ठेकेदार कंपनी के बकाया भुगतान के संबंध में शपथ पत्र प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए थे।
उसी के अनुरूप प्राधिकरण की ओर से शपथ पत्र न्यायालय में दाखिल किया गया। गुरुवार को जैकवेल से नक्षत्र वाड़ी स्थित जलशुद्धिकरण केंद्र तक के कार्यों का निरीक्षण किए जाने की जानकारी भी सामने आई है।
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आगामी सुनवाई में इस निरीक्षण रिपोर्ट पर न्यायालय विचार करेगा सुनवाई के दौरान अधिवक्ता राजेंद्र देशमुख, मूल याचिकाकर्ता अधिवक्ता अमित मुखेडकर तथा अधिवक्ता चिनोद पाटील सहित अन्य पक्षकारों ने भी अपना पक्ष रखा।