
प्रतीकात्मक तस्वीर ( सोर्स: सोशल मीडिया )
MIDC Land Grabbing Allegations Maharashtra: छत्रपति संभाजीनगर में सियासी पारा उस समय चढ़ गया जब एमआईएम (MIM) के प्रदेशाध्यक्ष और पूर्व सांसद इम्तियाज जलील ने जिले के पालकमंत्री संजय शिरसाट के बयानों पर तीखा पलटवार किया।
जलील ने शिरसाट की आलोचना का जवाब देते हुए कहा कि जो लोग ‘खोकों’ (करोड़ों रुपये) के लिए गुवाहाटी जाकर बिक चुके हैं, उन्हें दूसरों को नैतिकता और नीतिमत्ता सिखाने का कोई संवैधानिक या नैतिक अधिकार नहीं है। जलील का यह बयान सीधे तौर पर शिवसेना (शिंदे गुट) की बगावत और महायुति सरकार के गठन की ओर इशारा था।
इम्तियाज जलील ने अपनी प्रेस वार्ता के दौरान पालकमंत्री पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि पालकमंत्री अपने पद का दुरुपयोग कर रहे हैं।
जलील ने आरोप लगाया कि गरीब दलित समाज की जमीनों को हड़पने वालों और एमआईडीसी (MIDC) की बेशकीमती जमीनों को अपनी जेब में डालने वालों का असली चेहरा जनता के सामने आ चुका है।
उन्होंने शिरसाट को चुनौती देते हुए कहा कि वे खुद के गिरेबान में झांककर देखें कि उन्होंने विकास के नाम पर कितनी जमीनों का बंदरबांट किया है।
महानगरपालिका चुनाव की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए जलील ने कहा कि 65 वार्डों में प्रत्याशियों का निर्विरोध जीतना लोकतंत्र की हत्या का संकेत है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा और शिंदे गुट के गठबंधन ने प्रशासनिक मशीनरी का उपयोग कर विपक्षी उम्मीदवारों पर दबाव बनाया।
जलील के अनुसार, कई उम्मीदवारों को डरा-धमकाकर उनके नामांकन वापस लेने पर मजबूर किया गया, ताकि लोकतांत्रिक प्रक्रिया को अपनी सुविधानुसार प्रभावित किया जा सके।
पार्टी के भीतर चल रही खींचतान और असंतोष पर पूछे गए सवाल का जवाब देते हुए इम्तियाज जलील ने स्वीकार किया कि कुछ लोग पार्टी में बगावत कर रहे हैं और उनसे नाराज हैं।
हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि पार्टी प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने उन्हें महाराष्ट्र में काम करने की जिम्मेदारी सौंपी है और वे अपने मुख्य उद्देश्य से पीछे नहीं हटेंगे।
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उन्होंने कार्यकर्ताओं से अपील की कि निजी नाराजगी का नुकसान पार्टी को नहीं होना चाहिए। उन्होंने दोहराया कि वे महाराष्ट्र में संगठन को मजबूत करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।






