
AIMIM नेता इम्तियाज जलील (सोर्स: सोशल मीडिया)
Imtiyaz Jaleel Statement On Hijab Controversy: बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से जुड़े हिजाब विवाद और उस पर उत्तर प्रदेश के मंत्री की टिप्पणी के बाद सियासत गरमा गई है। इसी मुद्दे पर AIMIM नेता इम्तियाज जलील का आक्रामक बयान सामने आया है, जिसने राजनीतिक तापमान और बढ़ा दिया है।
देश की राजनीति में एक बार फिर हिजाब और महिला सम्मान का मुद्दा केंद्र में आ गया है। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा एक महिला के चेहरे से नकाब हटाए जाने की घटना और फिर उस पर उत्तर प्रदेश के एक मंत्री की विवादित टिप्पणी ने राजनीतिक तूफान खड़ा कर दिया है। इस पूरे मामले ने सोशल मीडिया से लेकर चुनावी मंचों तक तीखी प्रतिक्रियाओं को जन्म दिया है।
इसी विवाद के बीच AIMIM नेता और छत्रपति संभाजीनगर के पूर्व सांसद इम्तियाज जलील ने महाराष्ट्र के जालना में एक रैली को संबोधित करते हुए बेहद तीखा बयान दिया। उन्होंने कहा कि अगर कोई भी व्यक्ति मुस्लिम महिलाओं को गलत इरादे से छूने की हिम्मत करेगा, तो “उसका हाथ काट दिया जाएगा।” उनके इस बयान ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है।
जलील ने सीधे तौर पर हिजाब विवाद को लेकर नीतीश कुमार को निशाने पर लिया। उन्होंने उत्तर प्रदेश के मंत्री संजय निषाद की टिप्पणी का हवाला देते हुए कहा कि इस तरह के बयान मुस्लिम महिलाओं के सम्मान पर सीधा हमला हैं। उल्लेखनीय है कि संजय निषाद ने इस घटना को लेकर कहा था, “अगर उन्होंने उसे कहीं और छुआ होता तो क्या होता?” जिसके बाद भारी विरोध हुआ था।
संजय निषाद की पार्टी ने बाद में सफाई देते हुए कहा कि उनके बयान को तोड़-मरोड़कर पेश किया गया और उसका गलत अर्थ निकाला गया। हालांकि, तब तक बयान सोशल मीडिया पर वायरल हो चुका था और राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया था।
इम्तियाज जलील ने अपने भाषण में केवल सत्ताधारी दलों को ही नहीं, बल्कि तथाकथित धर्मनिरपेक्ष दलों को भी कटघरे में खड़ा किया। उन्होंने आरोप लगाया कि ये दल गुंडों और आपराधिक तत्वों का समर्थन करने में तो पीछे नहीं रहते, लेकिन मुसलमानों के समर्थन या उन्हें नेतृत्व देने के समय हिचकिचाते हैं।
जलील ने कहा कि अक्सर AIMIM को सांप्रदायिक और अछूत पार्टी बताया जाता है, जबकि हकीकत यह है कि वही दल सबसे ज्यादा सांप्रदायिक रवैया अपनाते हैं जो मुसलमानों को राजनीतिक नेतृत्व में आगे बढ़ने नहीं देना चाहते। उनके मुताबिक, मुस्लिम समुदाय को बराबरी का प्रतिनिधित्व देना अब भी कई दलों के लिए असहज विषय बना हुआ है।
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यह बयान ऐसे समय आया है, जब 15 जनवरी को जालना नगर निगम चुनाव होने हैं। जलील यहां AIMIM के 17 उम्मीदवारों के समर्थन में प्रचार कर रहे थे। उनका यह आक्रामक भाषण चुनावी रणनीति और राजनीतिक संदेश दोनों के तौर पर देखा जा रहा है।
इम्तियाज जलील के शब्दों की तीव्रता, हिजाब जैसे संवेदनशील मुद्दे और चुनावी माहौल, इन तीनों ने मिलकर इस बयान को वायरल बना दिया। समर्थकों ने इसे मुस्लिम महिलाओं के सम्मान की “कड़ी रक्षा” बताया, जबकि आलोचकों ने भाषा को उकसाने वाला करार दिया।
हिजाब विवाद अब सिर्फ एक घटना नहीं रहा, बल्कि यह राजनीति, महिला सम्मान और अभिव्यक्ति की सीमाओं पर बड़ी बहस का रूप ले चुका है। इम्तियाज जलील का बयान इस बहस को और तेज़ करता नजर आ रहा है, जिसका असर आने वाले चुनावी दिनों में भी दिख सकता है।






