छत्रपति संभाजीनगर में शिवसेना और भाजपा के बीच ‘अजीबोगरीब गठबंधन’, कुछ सीटों पर साथ, कुछ पर एक-दूसरे के खिलाफ
Shiv Sena BJP Dispute: संभाजीनगर में शिवसेना और बीजेपी के बीच सीट शेयरिंग विवाद के बाद कुछ सीटों पर दोनों पार्टियां साथ मिलकर प्रचार करेंगी, जबकि कुछ सीटों पर वे एक-दूसरे के खिलाफ चुनाव लड़ेंगी।
- Written By: आंचल लोखंडे
Mahayuti seat sharing (सोर्सः सोशल मीडिया)
Chhatrapati Sambhajinagar Alliance: छत्रपति संभाजीनगर में महायुति का ‘अजीबोगरीब’ खेल और राजनीति में एक नया पैटर्न सामने आया है। हालांकि राज्य की राजनीति में महायुति की हवा चल रही है, लेकिन छत्रपति संभाजीनगर में शिवसेना और बीजेपी के बीच ‘अजीबोगरीब’ गठबंधन देखा जा रहा है। सीट शेयरिंग का फॉर्मूला तय होने के बाद राजनीतिक गलियारों में बड़ी हलचल मच गई है, क्योंकि दोनों पार्टियों ने उन सीटों पर AB फॉर्म दे दिए हैं जो उनके हक की हैं।
अब सवाल यह उठ रहा है कि यह महायुति की ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ है या अंदरूनी गुटबाजी। दिलचस्प बात यह है कि कुछ सीटों पर दोनों पार्टियां मिलकर प्रचार करेंगी, जबकि कुछ सीटों पर वे एक-दूसरे के खिलाफ भिड़ती नजर आएंगी।
27-25 फॉर्मूला और सत्तार का ‘धोखा’
राज्य मंत्री अतुल सावे ने पूरे मामले पर अहम जवाब दिया है। सावे के अनुसार, BJP और शिवसेना के बीच सीट शेयरिंग का एक साफ़ फॉर्मूला तय हुआ था, यानी 27 (BJP) और 25 (शिवसेना)। दोनों पक्षों ने इस पर हस्ताक्षर भी किए थे। लेकिन, MLA अब्दुल सत्तार ने इस फॉर्मूले को अस्वीकार करने पर सिल्लोड में 11 सीटों पर ‘फ्रेंडली’ लड़ने का फैसला लिया गया। हालांकि यह मामला सिर्फ सिल्लोड तक सीमित नहीं है।
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BJP का बिना हिचकिचाहट के जवाबी हमला
अतुल सावे ने बताया कि शिवसेना ने अचानक अपना AB फॉर्म दे दिया, जबकि गठबंधन तय हो चुका था। सावे ने कहा, “हम कहीं भी बगावत नहीं करना चाहते थे, इसलिए हमने शुरू में AB फॉर्म नहीं दिया।
लेकिन जब शिवसेना ने दोस्ती से आगे बढ़कर 11 सीटों पर उम्मीदवार उतारे, तो हमें बिना किसी हिचकिचाहट के 5 सीटों पर अपना AB फॉर्म देना पड़ा।” शिवसेना ने BJP के हिस्से की 11 सीटों पर दावा किया है, जबकि BJP ने जवाब में शिवसेना की 5 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे हैं।
कैंपेनिंग का अलग पैटर्न
अब छत्रपति संभाजीनगर में कैंपेनिंग का एक अलग पैटर्न देखने को मिलेगा। जहां अलायंस के उम्मीदवार आधिकारिक हैं, वहां BJP-शिवसेना मिलकर वोट मांगेंगे।
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लेकिन जहां ‘फ्रेंडली’ फाइट है, वहां एक-दूसरे का नाम लिया जाएगा। सावे ने एक इशारा करते हुए कहा, “यह नहीं कहा जा सकता कि अलायंस नहीं है, लेकिन अब हमें स्थिति के हिसाब से रणनीति बदलनी होगी।” यह देखना दिलचस्प होगा कि इस अंदरूनी झगड़े से महाविकास अघाड़ी को फायदा होगा या महायुति के दोनों उम्मीदवार चुने जाएंगे।
