मनपा चुनाव के बाद 23वां महापौर कौन? आरक्षण बना सियासी चर्चा का केंद्र; शहर में बढ़ी उत्सुकता
Election Campaign: मनपा चुनाव प्रचार खत्म होते ही छत्रपति संभाजीनगर में 23वें महापौर पद के आरक्षण ड्रा को लेकर सियासी हलचल तेज है। आरक्षण कब और किस वर्ग के लिए होगा, इस पर नजरें टिकी हैं।
- Written By: अंकिता पटेल
प्रतीकात्मक तस्वीर ( सोर्स: सोशल मीडिया )
Maharashtra Politics: छत्रपति संभाजीनगर मनपा चुनाव का प्रचार खत्म होने के बाद शहर के भावी नगरसेवकों की नजरें 23वें महापौर पद की आरक्षण ड्रा पर टिकी हुई हैं। यह पद किस वर्ग के लिए आरक्षित होगा व किसे अवसर मिलेगा? यह मुद्दा इन दिनों चुनावी चर्चाओं के केंद्र में है।
चुनाव प्रचार के अंतिम दिन शहरभर में भाएं, डोर-टू-डोर मतदाता संपर्क व कॉर्नर मीटिंग्स जोर-शोर से हुआ है। सभी राजनीतिक दल सत्ता में आने के दावे कर रहे हैं। हालांकि, अब तक महापौर आरक्षण घोषित नहीं किया गया है व नागरिकों की नजरें उस पर लगी हैं।
अब तक की परंपरा के अनुसार आरक्षण ड्रा के बाद ही मनपा चुनावों की घोषणा होती रही है। वर्ष 2019 में नगर विकास विभाग की ओर से महापौर पद की आरक्षण ड्रा निकाला गया था।
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परंतु उस समय चुनाव संपन्न नहीं हो पाए। इसी कारण अब नई आरक्षण प्रक्रिया की जरूरत है। राजनीतिक हलकों में यह भी चर्चा है कि इस बार चुनाव होने के बाद ही महापौर पद का ड्रा निकाला जा सकता है।
अब तक महापौर पद के लिए विभिन्न आरक्षण वर्गों के अंतर्गत नियुक्तियां की गई हैं। नागरिकों के पिछड़ा वर्ग आरक्षण से डॉ. भागवत कराड़ व विकास जैन, महिला आरक्षण के तहत विमल राजपूत व रुक्मिणी शिंदे को अवसर मिला था।
मतगणना के बाद बदल सकती है प्रतिक्रिया
सामान्य वर्ग से किशनचंद तनवाणी व विजया रहाटकर, ओबीसी महिला में अनीता घोडेले, सामान्य महिला में कला ओझा, सामान्य आरक्षण में त्र्यंबक तुपे व भगवान घड़ामोड़े वही अन्य पिछड़ा वर्ग अर्थात ओबीसी से नंदकुमार घोडेले को महापौर बनने का अवसर मिला था।
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उल्लेखनीय है कि 13 नवंबर 2019 को वर्ष 2020 की संभावित चुनाव प्रक्रिया को ध्यान में रखते हुए ढाई वर्ष की अवधि के लिए महापौर पद का आरक्षण ड्रा निकाला गया था, जिसमें महापौर पद सामान्य महिला वर्ग के लिए घोषित किया गया था।
