विकास या आफत? कड़बी चौक से मोतीबाग मार्ग खस्ताहाल, गड्ढों और मलबे के बीच जान जोखिम में डालने को मजबूर राहगीर
Kadbi Chowk Flyover Project: नागपुर का कड़बी चौक-मोमिनपुरा फ्लाईओवर 5 साल बाद भी अधूरा है। बदहाल सड़क, मलबा और जलभराव से रोजाना हजारों वाहन चालकों को परेशानी और हादसों का खतरा झेलना पड़ रहा है।
- Written By: अंकिता पटेल
कड़बी चौक फ्लाईओवर, (सोर्स: नवभारत डिजाइन फोटो)
Nagpur Flyover Construction Delay: नागपुर जिले में विकास के दावों के बीच प्रशासनिक अनदेखी का इससे बड़ा उदाहरण क्या होगा कि जिस परियोजना की शुरुआत जनता को राहत देने के लिए की गई थी वही अब लोगों के लिए मुसीबत का सबब बन चुकी है। महारेल अर्थात महाराष्ट्र रेल इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन द्वारा बड़े जोर-शोर से शुरू किए गए कड़बी चौक-मोमिनपुरा फ्लाईओवर निर्माण कार्य के 5 साल पूरे हो चुके हैं लेकिन परियोजना आज भी अधर में ही लटकी है।
मतलब फ्लाईओवर का काम अधूरा ही नहीं, बल्कि इतना अधूरा है की कोई आम नागरिक इसकी मौजूदा स्थिति को देखकर यह भी समझ नहीं सकेगा कि अभी इसके शुरू होने में और कितना समय लगेगा। आलम यह है कि कड़बी चौक से गार्डलाइन अंडरब्रिज और रेलवे म्यूजियम (रामझूला मार्ग) तक पहले चरण का काम भी पूरा नहीं हो पाया है, जबकि बोरियापुरा से मोमिनपुरा और टिमकी लैंडिंग तक का निर्माण कार्य पूरी तरह ठप पड़ा है।
इस फ्लाईओवर के निर्माणाधीन मार्ग पर चारों तरफ बिखरा मलबा और बारिश के पानी से भरे गहरे गड्ढे रोजाना वाहन चालकों का इम्तिहान ले रहे हैं। कड़बी चौक से मोतीबाग रेलवे क्रॉसिंग तक की सड़क खस्ताहाल हो चुकी है जहां से गुजरना जान जोखिम में डालने जैसा है।
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कई बार तो यहां वाहन चालकों को मार्ग की हालत देखकर वापस लौटना पड़ जाता है। लेकिन महारेल इन मार्गों की मरम्मत तक नहीं करा पा रहा है। इससे साफ है कि उन्हें आम जनता को हो रही तकलीफ से कोई सरोकार नहीं है।
महारेल के दावे हो रहे हवा
मोमिनपुरा फ्लाईओवर को एक चरण में कड़बी चौक से मोतीबाग रेलवे अंडरब्रिज तक और दूसरे चरण में गार्डलाइन से टिमकी तक बनाया जाना है। इसकी लैंडिंग कडबी चौक अंडरब्रिज से रेलवे म्यूजियम (रामझूला मार्ग) पर और तीसरी लैंडिंग टिमकी में होगी, लेकिन अब तक फ्लाईओवर अधूरा पड़ा है।
इस बीच पिछले वर्ष महारेल ने दावा किया कि नवंबर 2025 तक कड़बी चौक से रेल म्यूजियम लैंडिंग के पहले चरण का काम पूरा हो जाएगा लेकिन दावा हवा हो गया, महारेल फिर से यह दावा कर रहा है कि इस बार नवंबर-दिसंबर तक यह पहला चरण पूरा कर लिया जायेगा।
डेढ़ साल का लक्ष्य, 5 साल बाद भी अधूरा प्रोजेक्ट
इस प्रोजेक्ट का भूमिपूजन जुलाई 2021 में केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के हाथों किया गया था। तब राज्य की सत्ता में महाविकास आघाड़ी थी और भूमिपूजन कार्यक्रम में तत्कालीन मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे भी वर्चुअली जुड़े थे।
महारेल ने महज डेढ़ वर्ष में इस प्रोजेक्ट को पूरा करने का लक्ष्य दर्शाया था लेकिन जैसे जैसे समय बीतता गया, काम की रफ्तार भी मंद होती चली गई। काम इतना धीमा हुआ की आज भी इसे पूरा नहीं किया जा सका है, महारेल ने इस प्रोजेक्ट का जिम्मा पीवीआर को दिया था लेकिन पिछले करीब 3 वर्षों से गुजराती कंपनी अंसारी इरेक्टर्स द्वारा संभाला जा रहा है।
5 वर्षों से जारी है गड्डों का ‘टॉर्चर’
मोमिनपुरा फ्लाईओवर परियोजना का काम पिछले 5 सालों से घिसट रहा है लेकिन महारेल ने यहां की सड़कों की सुध लेना तक मुनासिब नहीं समझा। पिछले 5 सालों में हर मानसून की तरह इस बार भी इस फ्लाईओवर मार्ग की सड़क गड्ढों में तब्दील हो चुकी है और उनमें लबालब पानी भरा हुआ है। कड़बी चौक से मोतीबाग रेलवे क्रॉसिंग तक सड़क भयंकर खस्ताहाल है।
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पानी से भरे गड्डों में रोज वाहन चालक फिसलकर गिर रहे हैं। वहीं बोरियापुरा से मोमिनपुरा तक पिछले 5 वर्षों से पैचवर्क तक नहीं किया गया जिससे यहां से आवाजाही बेहद खतरनाक हो गई है। निर्माण कार्य की सुस्त चाल और ठेकेदार की लापरवाही का खामियाजा रोज आम जनता को अपनी जान जोखिम में डालकर भुगतना पड़ रहा है।
सीपीएम मौन
इस मामले को लेकर ‘नवभारत’ ने सीपीएम सुशील कुमार शर्मा से संपर्क किया, कई बार उन्हें कॉल कर मौजूदा स्थिति और काम की मंद गति के बारे पूछने का प्रयास किया गया लेकिन वे बिना कोई प्रतिसाद दिए मौन रहे।
