
छत्रपति संभाजीनगर महानगरपालिका (सोर्स: सोशल मीडिया)
Chhatrapati Sambhajinagar Mayor Race: मुंबई के बाद राज्य की सबसे अधिक चर्चा में रहने वाली छत्रपति संभाजीनगर महानगरपालिका में अब महापौर पद को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। नगर निगम चुनाव में सबसे अधिक सीटें हासिल कर अव्वल रही भारतीय जनता पार्टी को महापौर पद का सबसे मजबूत दावेदार माना जा रहा है। पार्टी की निर्णायक बढ़त के चलते राजनीतिक गलियारों में यह लगभग तय माना जा रहा है कि अगला महापौर भाजपा से ही होगा। हालांकि अंतिम तस्वीर महापौर पद के आरक्षण की घोषणा के बाद ही पूरी तरह स्पष्ट होगी।
करीब दस वर्षों के लंबे अंतराल के बाद हुए नगर निगम चुनाव में भाजपा ने जोरदार प्रदर्शन किया है। 115 सदस्यीय सदन में भाजपा ने 57 सीटों पर जीत दर्ज कर स्पष्ट बढ़त बनाई है। यह जीत इसलिए भी अहम मानी जा रही है क्योंकि भाजपा ने न केवल अपने सहयोगी दलों को पीछे छोड़ा बल्कि विपक्षी दलों को भी करारी शिकस्त दी। इस ऐतिहासिक परिणाम के बाद भाजपा खेमे में उत्साह का माहौल है और महापौर पद के लिए दावेदारी खुलकर सामने आने लगी है।
छत्रपति संभाजीनगर के महापौर पद के लिए फिलहाल सबसे बड़ा सवाल आरक्षण को लेकर है। अभी तक आरक्षण घोषित नहीं होने के कारण किसी एक नाम पर मुहर नहीं लग पाई है। राजनीतिक सूत्रों के अनुसार अगले सप्ताह आरक्षण की प्रक्रिया पूरी होने की संभावना है।
आरक्षण स्पष्ट होते ही भाजपा अपनी अंतिम रणनीति तय कर उम्मीदवार के नाम की घोषणा कर सकती है। इसी बीच अन्य दल भी अपने अपने स्तर पर समीकरण साधने और संभावनाएं टटोलने में जुटे हुए हैं। सूत्रों के मुताबिक भाजपा जल्द ही अपने गटनेता का चयन कर विभागीय आयुक्त के समक्ष तुलनात्मक संख्याबल प्रस्तुत करेगी। सभी दलों को अपने संख्याबल के आधार पर गुट पंजीकरण प्रक्रिया पूरी करनी होगी। यदि भाजपा को एक और पार्षद का समर्थन मिलता है तो पार्टी को एकहाती सत्ता का रास्ता भी खुल सकता है, जिसे लेकर अंदरूनी स्तर पर प्रयास किए जा रहे है।
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शहरवासियों की निगाहें अब महापौर पद की आरक्षण कोटा पर टिकी है। आरक्षण घोषित होते ही यह साफ हो जाएगा कि महापौर की कुर्सी किस वर्ग के लिए आरक्षित होगी और छत्रपति संभाजीनगर शहर का पहला नागरिक कौन बनेगा। आने वाले कुछ दिन शहर की राजनीति के लिहाज से बेहद अहम माने जा रहे है।






