छत्रपति संभाजीनगर: अमेरिका-ईरान युद्ध का असर; घरेलू गैस को प्राथमिकता, उद्योगों पर संकट के बादल
Chhatrapati Sambhajinagar News: अमेरिका-ईरान युद्ध के चलते केंद्र का बड़ा फैसला: घरेलू एलपीजी को प्राथमिकता। छत्रपति संभाजीनगर के ऑटोमोबाइल और इंजीनियरिंग उद्योगों में उत्पादन ठप होने का डर
- Written By: रूपम सिंह
प्रतीकात्मक तस्वीर (सोर्स: सोशल मीडिया)
Chhatrapati Sambhajinagar LPG Supply: अमेरिका व ईरान के बीच जारी युद्ध के चलते देश को होने वाली गैस की आपूर्ति में आ रही बाधाओं के बीच घरेलू रसोई गैस (एलपीजी) की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए केंद्र सरकार ने एक विशेष निर्णय लिया है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने 5 मार्च 2026 को आदेश जारी कर एलपीजी की आपूर्ति को प्राथमिकता से घरेलू उपयोग के लिए सुरक्षित रखने के निर्देश दिए हैं। यह निर्देश अमेरिका व ईरान के बीच चल रहे युध्द के चलते दिए गए है।
छत्रपति संभाजीनगर शहर का बड़ा औद्योगिक क्षेत्र एमआईडीसी (चिकलठाणा, शेंद्रा, वालूज आदि) प्राकृतिक गैस और एलपीजी आधारित ऊर्जा पर काफी निर्भर है। ऐसे में गैस आपूर्ति प्रभावित होने पर जिले के उद्योगों पर बुरा असर पड़ने के आसार है। सरकार ने देश की सभी तेल रिफाइनिंग कंपनियों को प्रोपेन और ब्यूटेन गैस के उत्पादन का अधिकतम उपयोग एलपीजी बनाने में करने तथा इसे सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों को उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है।
यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है और अगले आदेश तक प्रभावी रहने को लेकर निर्देश जारी किए गए है। सरकार का कहना है कि एलपीजी देश के करोड़ों परिवारों के लिए खाना पकाने का प्रमुख ईंधन है और इसकी निर्बाध उपलब्धता बनाए रखना सार्वजनिक हित के लिए आवश्यक है।
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औद्योगिक क्षेत्र में चिंता, वाहन उद्योग चपेट में
हालांकि इस निर्णय के बाद उद्योग जगत में गंभीर चिंता सामने आई है। ऑटोमोबाइल और – इंजीनियरिंग उद्योगों में कई उत्पादन प्रक्रिया एलपीजी आधारित फर्नेस पर निर्भर है। पाउडर कोटिंग और पेंटिंग जैसी प्रक्रियाओं में एलपीजी का बड़े पैमाने पर उपयोग किया जाता है। उद्योग प्रतिनिधियों के अनुसार – एक लघु उद्योग इकाई में इन प्रक्रियाओं के लिए प्रतिमाह करीब 8 से 10 हजार किलोग्राम तक एलपीजी की खपत होती है।
छत्रपति संभाजीनगर शहर के एक नामचीन उद्यमी ने अपना नाम न छापने की शर्त पर नवभारत को बताया कि छत्रपति संभाजीनगर के एमआईडीसी क्षेत्रों में स्थित कई नामचीन कंपनियों में पाउडर कोटिंग व पेंटिंग जैसी प्रक्रियाओं में एलपीजी का इस्तेमाल करते है। सरकार द्वारा दो दिन पूर्व जारी किए आदेश के बाद बजाज जैसी कंपनियों को विविध पार्ट सप्लाय करनेवाली कंपनियों के कामकाज पर बुरा असर पड़ना तय है। युद्ध और लंबा चला तो शहर की कई कंपनियां को ताले भी लगाने पड सकते है।
उत्पादन लागत में होगी वृद्धि
उचर, शहर के एक नामचीन उद्यमी ने नवभारत से बातचीत में कहा कि कोरोना में जिस तरह हालत जिले के उद्योग क्षेत्र में पैदा हुए थे। उसी तरह के हालात अमेरिका व ईरान युद्ध के चलते गैस की आपूर्ति न होने पर निर्माण हो सकते है। गैस की कमी या आपूर्ति बाधित होने पर उद्योगों को वैकल्पिक ईंधन जैसे डीजल या फर्नेस ऑयल का उपयोग करना पड सकता है। इससे ऊर्जा लागत काफी बढ़ जाएगी, जिसका सीधा असर उत्पादन खर्च पर पड़ेगा।
सरकार के आदेश की प्रमुख बातें
- एलपीजी की आपूर्ति को घरेलू उपयोग के लिए प्राथमिकता
- प्रोपेन और ब्यूटेन का अधिकतम उपयोग एलपीजी उत्पादन में
- रिफाइनरियों को सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों को आपूर्ति के निर्देश
- पेट्रोकेमिकल उत्पादों में उपयोग पर प्रतिबंध
- आदेश तत्काल प्रभाव से लागू
सीएमआईए सचिव सौंदलगेकर ने जताई चिंता
चेंबर ऑफ मराठवाड़ा इंडस्ट्रीज एंड एग्रीकल्बर (सीएमआईए) के मानद सचिव मिहिर सौंदलगेकर ने सरकार के इस आदेश पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि फिलहाल अधिकांश उद्योगों के पास सीमित मात्रा में गैस का स्टॉक उपलब्ध है, जिससे कुछ समय तक उत्पादन जारी रखना संभव होगा।
उन्होंने कहा कि यदि यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है तो उत्पादन प्रक्रिया के साथ-साथ रोजगार पर भी असर पड़ सकता है। उद्योग फिलहाल उपलब्ध स्टॉक के आधार पर कामकाज जारी रखने की कोशिश कर रहे हैं और साथ ही वैकल्पिक उपायों पर भी विचार किया जा रहा है। सौंदलगेकर ने उम्मीद जताई कि सरकार उद्योग क्षेत्र की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए इस विषय में पहल करेगी।
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छोटे उद्योग सबसे ज्यादा होंगे प्रभावित
छोटे व मध्यम उद्योग (एमएसएमई) के पास वैकल्पिक ऊर्जा व्यवस्था सीमित होती है, इसलिए गैस आपूर्ति रुकने पर सबसे अधिक असर इन्हीं उद्योगों पर पड़ने तय है। उत्पादन कम होने से ऑटोमोबाइल, फार्मा और इंजीनियरिंग उत्पादों की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। इससे कंपनियों के निर्यात ऑर्डर और सप्लाई चेन पर भी असर पड़ सकता है। वैसे, छत्रपति संभाजीनगर जिला ऑटोमोबाइल का हब है। ऐसे में सरकार के इस निर्णय का सबसे अधिक असर यहां के उद्योगों पर पड़ना तय है।
