छत्रपति संभाजीनगर में साइबर ठगी का नेटवर्क बेनकाब, म्यूल अकाउंट से हो रही थी रकम की हेराफेरी, 3 आरोपी गिरफ्तार
Sambhajinagar Cyber Fraud: छत्रपति संभाजीनगर में साइबर ठगी के 'म्यूल अकाउंट' मामले में तीन खाताधारकों पर केस दर्ज। 11 साइबर शिकायतों से जुड़े खातों के जरिए ठगी की रकम गिरोह तक पहुंचाने का आरोप।
- Written By: आलोक उमाकृष्ण
छत्रपति संभाजीनगर में साइबर ठगी (सोर्स: AI)
Sambhajinagar Cyber Fraud Mule Account Case: छत्रपति संभाजीनगर में साइबर ठगी से प्राप्त धनराशि को छिपाने और संगठित साइबर गिरोह तक पहुंचाने के लिए अपने बैंक खाते उपलब्ध कराने के मामले में जवाहरनगर थाना पुलिस ने तीन खाताधारकों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। जांच में सामने आया कि इन खातों का उपयोग म्यूल अकाउंट के रूप में किया जा रहा था। राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर इन खातों से देशभर की 11 साइबर ठगी की शिकायतें जुड़ी मिली हैं।
पुलिस के अनुसार, आरोपियों की पहचान आवेज मसूद शेख निवासी सादातनगर, सिद्धिकी फराज अहमद रिजवान अहमद निवासी टाइम्स कॉलोनी, कटकट गेट तथा आशीष सुभाष इंगले निवासी जेल क्वार्टर, हर्सूल के रूप में हुई है। तीनों के खिलाफ जवाहरनगर थाने में प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।
इस मामले में जवाहरनगर थाने के पुलिस कर्मी मारोती बबनराव गोरे की शिकायत पर कार्रवाई की गई। साइबर अपराधों की जांच के दौरान गृह मंत्रालय के राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल और ‘संवाण्या’ पोर्टल के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया। इसी दौरान जवाहरनगर क्षेत्र स्थित यस बैंक के दो खातों में संदिग्ध लेनदेन का पता चला।
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NCRP पोर्टल की जांच
जांच में सामने आया कि 29 दिसंबर 2025 से 8 जनवरी 2026 के बीच इन खातों के माध्यम से करीब 1.80 लाख रुपये का संदिग्ध लेनदेन हुआ। एक ही दिन में पूरी राशि चेक के माध्यम से निकाल ली गई। एनसीआरपी पोर्टल की जांच में पता चला कि इन खातों से देश के विभिन्न राज्यों में दर्ज 11 साइबर ठगी की शिकायतें जुड़ी हुई हैं। इनमें 11 जनवरी 2026 को दर्ज एक मामले में 47 हजार 740 रुपये की ठगी की राशि इन खातों में जमा कराई गई थी, जिसे बाद में चेक के जरिए निकाल लिया गया।
पुलिस पूछताछ में आरोपियों ने कथित रूप से स्वीकार किया कि उन्होंने कमीशन के बदले अपने बैंक खाते साइबर अपराधियों को उपयोग के लिए दिए थे। खातों में ठगी की रकम जमा होने के बाद उसे चेक के माध्यम से निकालकर गिरोह के सदस्यों तक पहुंचाया जाता था। जांच में यह भी सामने आया कि आरोपियों ने अपराध से अर्जित धनराशि को छिपाने और उसके वितरण में सक्रिय भूमिका निभाई।
पुलिस का कहना है कि साइबर ठगी के नेटवर्क में ऐसे बैंक खातों का उपयोग अपराध की रकम को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने के लिए किया जाता है, जिससे वास्तविक अपराधियों तक पहुंचना कठिन हो जाता है। मामले की आगे की जांच उपनिरीक्षक वाघ कर रहे हैं।
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म्यूल अकाउंट क्या होता है?
साइबर अपराधी ठगी की रकम सीधे अपने बैंक खातों में नहीं मंगाते। इसके बजाय वे अन्य लोगों के बैंक खाते कमीशन देकर उपयोग करते हैं। ऐसे खातों को म्यूल अकाउंट कहा जाता है। ठगी की रकम पहले इन खातों में जमा की जाती है और बाद में चेक, एटीएम या ऑनलाइन माध्यम से निकालकर आगे साइबर गिरोह तक पहुंचा दी जाती है।
इस कारण असली अपराधियों तक पहुंचना कठिन हो जाता है। कानून के अनुसार, जानबूझकर अपना बैंक खाता इस प्रकार उपलब्ध कराने वाले खाताधारकों को भी साइबर अपराध का सहआरोपी माना जाता है और उनके विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की जाती है।
– नवभारत लाइव के लिए छत्रपति संभाजीनगर से शफीउल्ला हुसैनी की रिपोर्ट
