आमिर खान को सोनम वांगचुक का समर्थन करना चाहिए… हुसैन दलवई का बड़ा बयान, बोले- पता नहीं क्यों डरे हुए है
Hussain Dalwai on Aamir Khan: हुसैन दलवई ने सोनम वांगचुक के अनशन को लेकर अभिनेता आमिर खान पर निशाना साधा है। दलवई ने कहा कि आमिर खान को नसीरुद्दीन शाह से हिम्मत सीखनी चाहिए और समर्थन करना चाहिए।
- Written By: गोरक्ष पोफली
हुसैन दलवई का बयान (सोर्स: सोशल मीडिया)
Hussain Dalwai Demands Aamir Khan Support For Sonam Wangchuk: कांग्रेस नेता हुसैन दलवई ने सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल के मामले में अभिनेता आमिर खान का जिक्र करते हुए उनसे समर्थन की मांग की। उन्होंने शुक्रवार को मीडिया से बातचीत में कहा कि आमिर खान को सोनम वांगचुक का समर्थन करना चाहिए, लेकिन अभिनेता ने अभी तक समर्थन नहीं किया है। पता नहीं क्यों, वह अब तक सोनम वांगचुक का समर्थन नहीं कर रहे हैं।
इसके अलावा अभिनेता हुसैन दलवई ने नसीरुद्दीन शाह का भी जिक्र किया। उनके मुताबिक नसीरुद्दीन शाह सरकार का समर्थन भी करते हैं और अगर कहीं पर गलती होती है, तो वह उसकी आलोचना भी करते हैं। आमिर खान को भी उनसे सीख लेते हुए उनके जैसी हिम्मत दिखानी चाहिए, लेकिन पता नहीं वह ऐसा नहीं कर रहे हैं, क्योंकि ये लोग डरे हुए हैं। कलाकार को कभी डरना नहीं चाहिए।
सिर्फ सम्मान से काम नहीं चलेगा, आगे आएं आमिर
कांग्रेस नेता हुसैन दलवई ने आमिर खान के उस बयान पर भी प्रतिक्रिया दी, जिसमें उन्होंने सोनम वांगचुक के भूख हड़ताल का जिक्र करते हुए कहा कि वह जिस तरह से अभी कर रहे हैं , वो ठीक नहीं है। यह स्थिति उनके लिए बहुत ही तकलीफदेह हो सकती है। कांग्रेस नेता ने कहा कि आमिर खान अभी सोनम वांगचुक का सम्मान कर रहे हैं, लेकिन सम्मान से काम नहीं चलेगा, बल्कि उन्हें आगे आकर समर्थन भी करना होगा।
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सोनम वांगचुक इस देश के सिस्टम को दुरुस्त करने के लिए अनशन कर रहे हैं। इससे पहले महात्मा गांधी भी देश की आजादी को लेकर भी अनशन कर चुके हैं। यह इस देश की खासियत है कि कई लोग अनशन कर सिस्टम में सुधार की मांग करते हैं। ऐसी स्थिति में हमें अनशन करने वाले लोगों के प्रति सहानुभूति दिखानी चाहिए, तभी जाकर आगे स्थिति सामान्य हो पाएगी।
हिंदुओं को बाध्य करने पर उठाया सवाल
वहीं, उन्होंने वंदे मातरम बिल पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि वंदे मातरम से किसी को कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन आरएसएस की शाखाओं गाए जाने वाले वंदे मातरम को अब यहां पर लाने की कोशिश की जा रही है। वंदे मातरम के आखिरी के बोल में देवी देवताओं का जिक्र किया गया है, जिसे व्यवहारिक जीवन में उतारना, मैं समझता हूं कि किसी भी स्थिति में ठीक नहीं है। सुजलाम सुफलाम जैसे अल्फाजों का जिक्र कर देश की खूबसूरती बयां करने की कोशिश की गई है। ऐसी स्थिति में हमें उसे गाने में कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन जानबूझकर के गैर हिंदुओं को वंदे मातरम गाने के लिए बाध्य किया जा रहा है, जो कि किसी भी सूरत में ठीक नहीं है।
सच्चाई यह है कि जब वंदे मातरम की बात चली थी, तब ये लोग भाग गए थे। वंदे मातरम का नारा मौलाना आजाद और गफ्फार खान भी देते थे। उस समय सभी लोग वंदे मातरम बोलकर ही अंग्रेजों के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए जेल जाते थे। तब ये लोग कहां थे, ये लोग उस वक्त अंग्रेजी की गुलामी किया करते थे। ऐसी स्थिति में इन लोगों को वंदे मातरम की तरफदारी करने की कोई जरूरत नहीं है।
वन नेशन-वन इलेक्शन से GDP बढ़ने के दावों को नकारा
इसके अलावा, उन्होंने वन नेशन और वन इलेक्शन पर भी अपनी राय रखी और उस दावों को भी सिरे से खारिज कर दिया, जिसमें यह कहा जा रहा है कि इसे धरातल पर उतारने के बाद देश की जीडीपी में वृद्धि होगी। उनके मुताबिक, ये लोग बेकार की बात कर रहे हैं कि वन नेशन और वन इलेक्शन को जमीन पर उतारने से देश की जीडीपी में बढ़ोतरी होगी। यह लोग कुछ भी बोल देते हैं। कुछ अमीरों के हाथ में सारा पैसा देने के बाद क्या जीडीपी बढ़ेगी। ऐसा नहीं होगा। इसके विपरीत गरीबों की गुरबत बढ़ रही है। बच्चों को एजुकेशन नहीं मिल रही है। स्वास्थ्य व्यवस्था खराब है, लेकिन इस बार कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
जिस तरह से चीन ने सभी को साथ लेकर विकास के काम किए, उसी तरह का विकास भारत में भी किया जाना चाहिए, लेकिन अफसोस की बात है कि ये लोग बार-बार जीडीपी का जिक्र कर रहे हैं। ऐसा करके ये लोग कुछ लोगों को सब कुछ दे देना चाहते हैं और बाकी के लोगों को गरीब ही छोड़ देना चाहते हैं। यह स्थिति बिल्कुल भी ठीक नहीं है।
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महाराष्ट्र की राजनीति और वित्त मंत्रालय को लेकर देवेंद्र फडणवीस पर तंज
उधर, एनसीपी नेताओं की एकनाथ शिंदे से हुई मुलाकात पर भी कांग्रेस नेता हुसैन दलवई ने प्रतिक्रिया दी। उनके मुताबिक, बात ऐसी है कि ये लोग सत्ता के बिना नहीं रह सकते हैं, इसलिए वहां जाएंगे लेकिन वित्त मंत्रालय चाहिए, लेकिन मुझे नहीं लगता है कि सीएम इस मंत्रालय को छोड़ेंगे। मैं जहां तक जानता हूं कि देवेंद्र फडणवीस वित्तीय और गृह मंत्रालय को किसी भी कीमत पर नहीं छोड़ेंगे। जयंत पाटिल को वित्तीय मंत्रालय चाहिए, लेकिन उन्हें नहीं मिलेगी। शायद छोटा मोटा मंत्रालय मिल जाएगा।
परिसीमन बिल पर सुप्रिया सुले की ओर से दिए गए बयान पर भी हुसैन दलवई ने अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि ऐसा कहा जा रहा है कि विपक्षी दलों ने परिसीमन बिल को लेकर बैठक की थी। परिसीमन बिल से क्या फायदा होगा। इस बारे में भी चर्चा होगी। अब सब कुछ सुप्रिया सुले के हाथों में हो, ऐसा मुझे नहीं लगता है। बीजेपी के साथ पवार साहब जाए, ऐसा मुझे बिल्कुल भी नहीं लगता है। पवार साहब का राजनीति में पालन पोषण कांग्रेस की विचारधाराओं के अनुरूप हुआ है। वो यशवंत राव चव्हाण से काफी प्रभावित थे। ऐसी स्थिति में मुझे नहीं लगता है कि वह बीजेपी के साथ जाएंगे।
