नवभारत विशेष: नकल माफिया का नया नेटवर्क! अब सर्वर हैक से टेलीग्राम तक फैला खेल

Exam Cheating Mafia: साइबर तकनीक के सहारे नकल माफिया प्रतियोगी परीक्षाओं में नए-नए हथकंडे अपना रहा है। सर्वर हैकिंग, टेलीग्राम व हाईटेक गैजेट्स ने परीक्षा प्रणाली के लिए गंभीर चुनौती खड़ी कर दी है।
Navbharat Special: The Cheating Mafia's New Network! The Game Now Spans from Server Hacking to Telegram.
नकल माफिया, साइबर अपराध,(सोर्स: नवभारत डिजाइन फोटो)
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Cyber Enabled Exam Fraud: साइबर अपराधियों से पोषित नकल माफिया अब और खतरनाक होता जा रहा है। अब नकल माफिया की मदद से भर्ती परीक्षा देने वाले अभ्यर्थियों को पुलिस अपराधी मान रही है। जिस तरह से चोर-डकैतों पर इनाम घोषित होता है, इन पर भी हो रहा है। राजस्थान के एसओजी ने पुलिस में भर्ती के लिए नकल के आरोप में एक अभ्यर्थी को हाल ही में गिरफ्तार किया है। पुलिस ने उस पर 10 हजार रुपये का इनाम रखा था तथा वह उस पद के लिए परीक्षा दे रहा था, जो जनता को कानून व्यवस्था के तहत सुरक्षा देने का काम करता है।

हाईटेक नकल माफिया बना युवाओं के भविष्य का दुश्मन

नकल माफिया के कुकृत्यों में चलते नीट परीक्षा में असफलता के डर से अब तक आधा दर्जन बच्चे आत्महत्या कर चुके हैं तथा एक लड़की मोबाइल छिपाकर लाने के कारण जेल में पहुंच गई है। आज नकल कराने की समस्या राजस्थान या महाराष्ट्र तक नहीं है। यह धीरे-धीरे पूरे देश में ठीक वैसे ही फैल रही है जैसे साइबर ठगों ने अपना नेटवर्क फैला रखा है।

यहां पर एक तरीका फेल होता है, तो दूसरा सामने आता है। पहले पर्चा चोरी होता था, अब सर्वर हैक करके पीडीएफ ही निकाल ली जाती है। पहले परीक्षार्थी पैसे लेकर एग्जाम देता था, अब डमी को इसके लिए रखा जाता है, ब्लू टूथ फेल हुआ तो अंगूठी, कानों के कुंडल, ताबीज आदि इसके लिए उपयोग होने लगे। इससे आगे अब तो टेलीग्राम पर भी नकल माफिया सक्रिय हो गया है। इंटरनेट के माध्यम से इतने रास्ते तलाश लिए गए हैं कि लगता है कि जैसे साइबर अपराधी, नकल माफिया को ट्रेनिंग दे रहा है।

नकल माफिया से करोड़ों युवाओं का भविष्य संकट में

नीट पेपर लीक होने से पूरा देश परेशान रहा, यूपी में पुलिस भर्ती के कारण 60 लाख युवा परेशान हो गए, राजस्थान में पुलिस विभाग में कितने नकलची भर्ती हुए हैं अभी तक उस पर तस्वीर साफ नहीं है, लेकिन गिरफ्तारी और हाईकोर्ट में जाने का सिलसिला जारी है।

पूरे देश का आंकड़ा खोजा जाए तो कम से कम एक करोड़ से अधिक सरकारी नौकरियां तो एंटी नेशनल एक्टिविटी में लगे नकल माफिया के कारण मझधार में हैं ही। सरकार जितनी सरकारी नौकरी दे रही है, उससे कई गुना अधिक बेरोजगार नकल माफिया के कारण परीक्षा पर परीक्षा दे रहे हैं और कभी रद्द परीक्षा तो कभी खुद ही नकल के कारण चयन प्रक्रिया से बाहर हो जाते हैं।

भले ही नकल माफिया और साइबर अपराधी अलग-अलग काम कर रहे हों पर अब इन्हें पुलिस भी एक ही मान रही है। ये संगठित अपराधी हैं, जो युवाओं का भविष्य और डिजिटल व्यवस्था को कमजोर कर रहे हैं। संगठित अपराध से जूझने के लिए साइबर कंट्रोल सेंटर बनाया गया है।

पेपर लीक से करोड़ों युवाओं का भविष्य दांव पर

परीक्षा के दौरान तलाशी लेने वाले या नकल पर नजर रखने के लिए अध्यापकों के साथ ही दूसरे विभागों के अधिकारी-कर्मचारी भी लगाने पड़ रहे हैं। नीट परीक्षा गड़बड़ी में 30 व्यक्ति गिरफ्तार हुए, इसमें 18 परीक्षा केंद्र के कर्मचारी भी शामिल हैं। खुद सीबीआई ने वर्ष 2022 की रेलवे की भर्ती परीक्षा के मामले में दो मुख्य अपराधी पकड़े।

यहां गिरफ्तारी की बात बताने का उद्देश्य डराना नहीं, बल्कि यह बताना है कि सरकार की ऊर्जा किस तरह से संगठित पेपर माफिया के खिलाफ लग रही है। नीट परीक्षा में यदि 500 करोड़ का नुकसान होने की आशंका है तो भर्ती परीक्षाओं के रद्द होने कारण बेरोजगारों को ही अब तक कई हजार करोड़ का नुकसान हो चुका है। सरकार का आंकड़ा कितना होगा यह खुद समझा जा सकता है।

ध्यान रहे कि अब तक एक दशक में करीबन 90 परीक्षाएं रद्द हुई, इससे 6.7 करोड़ बेरोजगार सीधे- सीधे प्रभावित हुए। सरकारी परीक्षाओं के रद्द होने से जहां अर्थव्यवस्था गड़बड़ाती है, वहीं सरकार की छवि भी धूमिल होती है। देश साइबर अपराधियों से पहले ही त्रस्त था और अब नकल माफिया ने उसके तरीके अपनाकर उसे और मजबूती प्रदान की है। जब यह दोनों देश और युवाओं को बर्बाद कर रहे हों तो इन्हें हल्के में नहीं लिया जा सकता।

बार-बार हो रही परीक्षा में धांधली

परीक्षाओं में बार-बार धांधली हो रही है। सरकारें बुलडोजर चलाएं, रासुका जैसा लगाएं वा कुछ भी करें पर बेरोजगारों को नौकरी मिले न कि जेल। कुछ ऐसा खेल इन एंटी नेशनल एक्टिविटी करने वालों के साथ भी खेलना होगा।

-लेख-मनोज वार्ष्णेय के द्वारा

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