बॉम्बे हाईकोर्ट की औरंगाबाद खंडपीठ का फैसला, RTI मामले में लगाया गया 1000 रुपये का जुर्माना रद्द

Chhatrapati Sambhajinagar के एक RTI मामले में राज्य सूचना आयोग द्वारा लगाया गया 1000 रुपये का आर्थिक दंड बॉम्बे हाईकोर्ट की औरंगाबाद खंडपीठ ने रद्द कर दिया।
Bombay High Court Of Aurangabad Bench
बॉम्बे हाईकोर्ट की औरंगाबाद बेंच (सौ. सोशल मीडिया )
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Aurangabad Bench RTI Decision: छत्रपति संभाजीनगर से जुड़े एक मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट की औरंगाबाद खंडपीठ ने राज्य सूचना आयोग द्वारा लगाया गया आर्थिक दंड रद्द कर दिया है।

न्यायमूर्ति सिद्धेश्वर ठोंबरे की पीठ ने सुनवाई के दौरान पाया कि मामले में लगाए गए दंड को लेकर पर्याप्त आधार नहीं था। इसके चलते अदालत ने याचिकाकर्ता को राहत प्रदान की।

दाखिल याचिका के अनुसार वर्ष 2015 में याचिकाकर्ता मनीषा मेने छत्रपति संभाजीनगर के जिला आपूर्ति कार्यालय में सहायक जिला आपूर्ति अधिकारी के पद पर कार्यरत थीं। उस समय अन्नधान्य वितरण अधिकारी पद पर कार्यरत कर्मचारी के निलंबित होने के कारण उस पद का अतिरिक्त कार्यभार भी मेने को दिया गया था। इसके साथ ही उन्हें जनसूचना अधिकारी की जिम्मेदारी भी सौंपी गई थी।

RTI के तहत मांगी गई थी जानकारी

इसी अवधि में आवेदक संतोष वाघलव्हाले ने सूचना का अधिकार अधिनियम (RTI) के तहत जिला आपूर्ति कार्यालय में आवेदन देकर संयुक्त परिवार के राशन कार्ड को अलग करने से संबंधित जानकारी मांगी थी। हालांकि आवेदक ने आरोप लगाया कि जानकारी निर्धारित समय में उपलब्ध नहीं कराई गई, जिसके बाद उन्होंने राज्य सूचना आयोग की छत्रपति संभाजीनगर खंडपीठ में अपील दायर की।

सूचना आयोग ने लगाया था जुर्माना

मामले की सुनवाई के बाद राज्य सूचना आयोग ने मनीषा मेने पर 1,000 रुपये का आर्थिक दंड लगाया था। आयोग का मानना था कि जानकारी उपलब्ध कराने में देरी हुई है, जिसके कारण यह कार्रवाई की गई।

हाईकोर्ट में चुनौती देकर मिली राहत

इसके बाद मनीषा मेने ने बॉम्बे हाईकोर्ट की औरंगाबाद खंडपीठ में याचिका दायर कर आयोग के फैसले को चुनौती दी। उन्होंने अदालत में बताया कि आवेदक को मांगी गई जानकारी निर्धारित समय के भीतर उपलब्ध कराई गई थी। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि राज्य सूचना आयोग ने उन्हें अपना पक्ष रखने का पर्याप्त अवसर नहीं दिया। मामले की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने आयोग द्वारा लगाया गया दंड रद्द कर दिया।

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