मेलघाट में 7 दिन में दो मौतें…परिजनों की जिद या सिस्टम का फेलियर? स्वास्थ्य विभाग ने तोड़ी चुप्पी
Amravati News: अमरावती के मेलघाट में 7 दिनों में दो मातामृत्यु हुई। इससे स्वास्थ्य विभाग पर उठे है। विभाग ने कहा कि समय पर उपचार दिया गया, परिजनों ने रेफरल और भर्ती से इनकार किया जिससे स्थिति बिगड़ी।
- Written By: आकाश मसने
प्रतीकात्मक तस्वीर (सोर्स: सोशल मीडिया)
Amravati Melghat Maternal Death News: अमरावती के मेलघाट क्षेत्र में 7 दिनों के भीतर हुई दो मातामृत्यु को लेकर स्वास्थ्य विभाग की कार्यक्षमता पर सवाल उठाए जा रहे थे। इस पर जिला स्वास्थ्य विभाग ने स्पष्टीकरण जारी करते हुए कहा है कि दोनों मामलों में स्वास्थ्य कर्मियों ने समय पर उपचार, बार-बार समुपदेशन और सभी आवश्यक प्रयास किए थे, लेकिन परिजनों का असहयोग और संदर्भ सेवा नकारने की प्रवृत्ति गंभीर बाधा सिद्ध हुई।
बिना बताए घर लौट आयी पीड़िता
यह महिला सिकलसेल से पीड़ित और ‘अति जोखिम’ श्रेणी की मरीज थी। गर्भावस्था के दौरान उसकी पांच बार जांच की गई और लगातार परामर्श दिया गया। जुलाई 2025 में रक्त संक्रमण के लिए उसे अचलपुर उपजिला अस्पताल भेजा गया, परंतु वह बिना बताए घर लौट आई।
स्वास्थ्य विभाग ने उसे खोजकर भर्ती होने को कहा, लेकिन उसने मना कर दिया। प्रसव पीड़ा शुरू होने पर हतरू पीएचसी ले जाया गया और फिर अचलपुर अस्पताल रेफर किया गया, लेकिन परिजनों ने जाने से इनकार किया। प्रसव के बाद भी वह डॉक्टरों की सलाह अनसुनी कर घर चली गई और 28 सितंबर 2025 को उसकी मौत हो गई।
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अचलपुर में उपचार के दौरान महिला की मौत
इसी तरह दूसरा मामला रानी प्रेम सावरकर का हुआ। यह भी ‘अति जोखिम’ श्रेणी की गर्भवती थी। 15 मई से सितंबर तक उसकी पांच बार जांच की गई और सोनोग्राफी व अन्य सेवाएं उपलब्ध कराई गईं। 17 सितंबर को प्रसव पीड़ा के बाद एंबुलेंस से काटकुंभ पीएचसी से अचलपुर उपजिला अस्पताल पहुंचाया गया। उसने एक बच्ची को जन्म दिया, लेकिन अगले दिन सुबह पेटदर्द शुरू हुआ और उपचार के दौरान उसकी मृत्यु हो गई।
मेलघाट की कठिन परिस्थितियां
विभाग ने स्पष्ट किया कि मेलघाट में 11 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, 2 ग्रामीण अस्पताल और एक उपजिला अस्पताल सक्रिय हैं। फिर भी, अति जोखिम वाली महिलाओं को जिला अस्पताल जैसे उच्चस्तरीय केंद्रों पर रेफर करना आवश्यक होता है।
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स्वास्थ्य के प्रति लापरवाही
- परिजन रेफरल सेवा नकार देते हैं।
- भर्ती होने के बाद मरीज अधूरा इलाज छोड़कर घर चली जाती है।
- प्रसूता अंतिम समय में अस्पताल पहुंचती है।
- इन कारणों से समय पर उचित उपचार देना कठिन हो जाता है।
पुनरावृत्ति रोकने के निर्देश
दोनों घटनाओं पर जिला स्तरीय जांच समिति ने रिपोर्ट प्रस्तुत की है। जांच में सामने आए त्रुटियों पर संबंधितों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की गई है। स्वास्थ्य विभाग ने कहा है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए और अधिक प्रभावी उपाय लागू किए जा रहे हैं।
