Chandur Railway municipal (सोर्सः सोशल मीडिया)
Chandur Railway Municipal News: चांदूर रेल्वे शहर में संपत्ति कर की बकाया राशि पर लगाए जा रहे भारी ब्याज और जुर्माने से आम नागरिकों की आर्थिक स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है। इस कथित अन्यायपूर्ण कर व्यवस्था के खिलाफ शहर में तीव्र असंतोष देखा जा रहा है और नागरिक प्रशासन से तत्काल राहत की मांग कर रहे हैं। शहर में एमआईडीसी क्षेत्र के अभाव के कारण बड़े उद्योग स्थापित नहीं हो सके हैं, जिससे बेरोजगारी का स्तर बढ़ा है। दूसरी ओर, कृषि उत्पादों के गिरते दाम, अस्थिर मजदूरी, प्राकृतिक आपदाएं और बाजार में उतार-चढ़ाव ने आमजन की आर्थिक स्थिति पर अतिरिक्त दबाव डाला है।
कोविड-19 महामारी के बाद कई छोटे-बड़े व्यवसाय बंद हो गए हैं और रोजगार के अवसर सीमित हो गए हैं। ऐसी स्थिति में वर्षों से लंबित संपत्ति कर की बकाया राशि पर लगातार बढ़ता ब्याज और जुर्माना नागरिकों के लिए गंभीर समस्या बन गया है। कई मामलों में ब्याज और जुर्माने की राशि मूल कर से दोगुनी या तिगुनी तक पहुंच गई है, जिससे कर भुगतान के बजाय बोझ और बढ़ता जा रहा है। शहर के गरीब, मेहनतकश मजदूर, किसान, खेत मजदूर और मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए संपत्ति कर भरना दिन-प्रतिदिन कठिन होता जा रहा है।
शिक्षा, स्वास्थ्य, बिजली, पानी, ईंधन और रोजमर्रा की आवश्यक वस्तुओं की बढ़ती महंगाई के चलते पारिवारिक बजट पहले से ही दबाव में है। ऐसे में संपत्ति कर का बढ़ता भार अनेक परिवारों को आर्थिक संकट की ओर धकेल रहा है। नागरिकों का कहना है कि जब दैनिक जरूरतें पूरी करना ही मुश्किल हो गया है, तो बढ़ा-चढ़ाकर लगाया गया संपत्ति कर कैसे चुकाया जाए। इसी पृष्ठभूमि में नागरिकों की ओर से संपत्ति कर पर लगाए गए ब्याज और जुर्माने को पूरी तरह माफ करने तथा मूल कर राशि में भी राहत देने की जोरदार मांग की जा रही है।
इस मुद्दे पर शहर की विभिन्न सामाजिक संस्थाएं, नागरिक और स्थानीय संगठन एकजुट हो रहे हैं। शीघ्र ही नगर परिषद प्रशासन को सामूहिक ज्ञापन सौंपने की तैयारी की जा रही है। कुछ नागरिकों ने संपूर्ण बकाया माफ करने की मांग की है, जबकि कुछ ने आसान और दीर्घकालीन किस्त योजना लागू करने का सुझाव दिया है, जिससे कर भुगतान संभव हो सके। यदि प्रशासन ने शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया, तो नागरिकों द्वारा लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन शुरू करने की चेतावनी भी दी गई है।
नागरिकों का कहना है कि वे शहर के विकास में सहयोग देने को तैयार हैं, लेकिन कर व्यवस्था न्यायसंगत, पारदर्शी और आम जनता की आर्थिक क्षमता के अनुरूप होनी चाहिए। चांदूर रेल्वे में संपत्ति कर का मुद्दा अब केवल आर्थिक नहीं, बल्कि सामाजिक स्वरूप भी ले चुका है। यदि समय रहते शासन और प्रशासन ने गंभीरता से ध्यान नहीं दिया, तो जन-असंतोष और अधिक उग्र होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
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चांदूर रेल्वे प्रॉपर्टी डेवलपर हर्षराज बागमार ने कहा कि “मेरे ऊपर संपत्ति कर 73,887 रुपये है, जिसमें 46,119 रुपये केवल ब्याज है। यदि यह ब्याज राशि कम की जाए, तो हम भी पूरा संपत्ति कर भरने के लिए तैयार हैं। नव-निर्वाचित नगराध्यक्ष और पार्षदों को इस विषय पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।”
नगर परिषद, चांदूर रेल्वे नगराध्यक्ष प्रियंका निलेश विश्वकर्मा ने कहा कि “यह विषय नगर परिषद की सभा में रखा जाएगा। इस पर चर्चा कर शासन स्तर पर आवश्यक उपाययोजना निश्चित रूप से की जाएगी।” राजेश सराफी ने कहा कि “नगर परिषद द्वारा संपत्ति कर पर चक्रवृद्धि दर से ब्याज लगाया जा रहा है। यदि चक्रवृद्धि ब्याज माफ कर नियमित ब्याज दर में थोड़ी कटौती की जाए, तो शहर के नागरिक निश्चित रूप से कर भुगतान करेंगे।”